गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान दिल्ली की संकल्प दृढ़ता की शानदार प्रस्तुति।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में ‘संकल्प में दृढ़ता’ नामक एक भक्तिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम देशभक्ति और आध्यात्मिकता का एक सुमधुर संगम रहा। जिसका उद्देश्य रहा कि हर व्यक्ति अपने सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में अटूट संकल्प (दृढ़ता), निःस्वार्थ सेवा और भक्ति के संग देशभक्ति को भी सिद्धांत के रूप में आत्मसात करे। संस्थान प्रतिनिधियों, निःस्वार्थ स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता ने सामूहिक उद्देश्य और साझा उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करना रहा, बल्कि संवैधानिक और नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करना रहा। साथ ही, प्रतिभागियों को नैतिक आचरण और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित करना भी रहा।
भक्तिपूर्ण भजनों और आध्यात्मिक प्रवचनों को समाहित करते हुए, इस आयोजन ने आंतरिक अनुशासन, सामूहिक सामंजस्य, तथा ईमानदारी, करुणा और अडिग समर्पण के साथ राष्ट्र सेवा की प्रतिबद्धता को जागृत करने का प्रयास किया।
इस भक्तिपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ श्री आशुतोष महाराज जी के साधक शिष्यों द्वारा प्रस्तुत आत्मास्पर्शी भजनों से हुआ। जिन्होंने दिव्य कृपा का आह्वान किया और प्रतिभागियों में भक्ति एवं कृतज्ञता की भावना को जागृत किया। आध्यात्मिक भावनाओं से भरपूर ये मधुर भजन भक्ति व देशप्रेम के भावों का सुंदर समावेश सिद्ध हुए।
आध्यात्मिक प्रवचन के माध्यम से, श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक शिष्यों ने उपस्थित साधक समाज को प्रेरित किया। अपने प्रभावशाली प्रवचनों में उन्होनें यह उजागर किया कि एक गणराज्य की शक्ति केवल कानूनों और शासन व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और जाग्रत चेतना पर आधारित होती है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरणा लेते हुए, वक्ता ने त्याग को राष्ट्र की स्वतंत्रता के मूलभूत मूल्य के रूप में रेखांकित किया। जिससे भावी पीढ़ियों को निःस्वार्थ समर्पण की भावना का बोध कराया जा सके। डीजेजेएस प्रतिनिधि ने आगे सेवा को सच्चे राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति के रूप में उजागर किया। श्रद्धालुओं को निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज की सेवा में सक्रिय रूप से संलग्न होने, वंचितों के उत्थान, नैतिक जीवनशैली के प्रचार, तथा अपनी-अपनी भूमिकाओं में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें समझाया गया कि जब सेवा विनम्रता और समर्पण के साथ की जाती है, तो वह एक पवित्र कर्तव्य बन जाती है, जो समाज और व्यक्तित्व दोनों को सुदृढ़ करती है। डीजेजेएस प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रीय प्रगति दो अलग-अलग पथ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक ही हैं। आत्म-चेतना और अनुशासन द्वारा स्वयं को रूपांतरित कर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से एक जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनता है।
डीजेजेएस प्रतिनिधि ने निष्कर्ष रूप में कहा कि भक्ति, आंतरिक शक्ति और नैतिक आचरण प्रदान करती है। जब भक्ति उच्चतर मूल्यों से जुड़ी होती है, तो यह अनुशासन, सहानुभूति और दृढ़ता को पोषित करती है, जो लोकतंत्र और सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक हैं। इसलिए प्रत्येक साधक को सच्ची भक्ति को केवल एक अनुष्ठान न मानकर, सत्य, धर्म और निःस्वार्थ कर्म के प्रति अटल प्रतिबद्धता के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
निस्संदेह, ‘संकल्प में दृढ़ता’ का विषय पूरे कार्यक्रम में गहराई से गूंजा। भक्तों को संवैधानिक मूल्यों के पालन, आध्यात्मिक व नैतिक आचरण की साधना और राष्ट्र-निर्माण में सार्थक योगदान के लिए दृढ़ संकल्पित होने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का समापन कृतज्ञता और नवसंकल्प की भावना के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागी अत्यंत प्रेरित और आत्मविश्लेषण के भाव से भरे नज़र आए।
साभार, दिव्य ज्योति
जाग्रति संस्थान गोरखपुर
