सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
मान लीजिए आप दो गाने सुनते हैं। पहले गाने को पहली बार सुना है और दूसरे गाने को पहले भी कई बार सुन चुके हैं। तो दूसरा गाना आपके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ेगा बजाय पहले गाने के।
यदि आज के इंसान को संसार और अध्यात्म में से किसी एक का चयन करने को कहा जाए, तो वह किसे चुनेगा? सर्वे बताते हैं कि अधिकतर ने संसार का चयन किया। क्यों? अध्यात्म को प्राथमिकता न मिलने का कारण क्या है? क्या अध्यात्म में कुछ कमी है या अध्यात्म महत्वपूर्ण नहीं है?
अध्यात्म को प्राथमिकता न मिलने का कारण है कि हमें उसके संपर्क में आने का मौका ही नहीं मिलता। हमारा अध्यात्म के प्रति संपर्क न के बराबर है। बचपन से ही हमें संसार दिखाया जाता है। उसके पदार्थों की शिक्षा दी जाती है। इसलिए स्वाभाविक है कि हमारा रुझान सांसारिक मोह माया के प्रति हो जाता है।
यदि जीवन के किसी पड़ाव पर आकर हमें अध्यात्म के बारे में सुनने को मिलता है, तो हम उसको प्राथमिकता नहीं दे पाते। पर यदि बचपन से ही हमें अध्यात्म से रूबरू कराया जाए, तो निश्चित ही हमारा चुनाव अध्यात्म होगा। हम संसार की अपेक्षा अध्यात्म जगत को प्राथमिकता देंगे क्योंकि हमें पता होगा कि वह हर मायने में संसार से बेहतर भी है और सुरक्षित भी।
**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**
"श्री रमेश जी"
