सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा.
संसार में हर इंसान अपना जीवन खुशी से जीना चाहता है। चाहे भी क्यों न? हर किसी को एक खुशहाल जीवन जीने का अधिकार जो है। पर हर किसी के लिए खुशी की परिभाषा अलग-अलग होती है। कुछ दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं, कुछ दोस्तों के साथ मौज- मस्ती करके खुश रहते हैं, तो कुछ परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण समय विता कर! कह सकते हैं, हर इंसान का जीवन एक तलाश है। खुशी पाने के लिए एक अनवरत खोज! इसलिए जब तक आपको यह विश्वास नहीं होगा कि आपका भविष्य बेहतर हो सकता है, तब तक आप खड़े होकर अपना भविष्य बेहतर करने की जिम्मेवारी नहीं लेंगे।
अंत में प्रश्न यह भी उठता है कि मनोबल को सशक्त कैसे करें! क्यों चाह कर भी हम अपनी परिस्थितियों से आगे नहीं बढ़ पाते? उत्तर यही है सज्जनो कि हम अपने आपको ठीक से नहीं जानते हैं। अपनी काबिलियत और क्षमताओं से अनजान है। इन्हीं को उजागर करने के लिए आत्म- साक्षात्कार करना आवश्यक है, जो सिर्फ और सिर्फ एक पूर्ण गुरु ही करा सकते हैं। पूर्ण गुरु के जीवन में आगमन पर जब ब्रह्मज्ञान प्राप्त होता है, तब अपने ही भीतर हम आत्मा का दर्शन कर पाते हैं। इसी जागृत आत्मा की साधना हमारे मन को संभल और सशक्त बना देती है।
अंत : सार यही है, यदि खुशी की खोज करनी है, तो अपनी ज्योतिर्मयी आत्मा को खोजिए। इसमें सद्गुरु ही आपका मददगार 'एंकर' बनते हैं।
ॐ श्रीं आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
