भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 809 वी काव्य गोष्ठी संरक्षक,श्री अरविन्द शर्मा जी के दस नं बोरिंग स्थित आवास पर फागोत्सव के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी ने किया एवं संचालन डा.सत्य नारायण 'पथिक'ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मां शारदे का आह्वान महासचिव, वरिष्ठ कवि बृजेश राय जी ने किया।
तत्पश्चात युवा कवि रत्नेश 'सृजन' ने अपनी रचना में घर के बॅटवारे की बात की -
सब कुछ/बंट चुका था/ सिवाय इसके/ कि मां किसके हिस्से में आयेगी।
वरिष्ठ भोजपुरी गीतकार अवधेश शर्मा 'नन्द' जी ने होली की नई पहचान बताई -
पीयर रंग सुभ ग्यान दे,लाल हमेसा नेहि।
उज्जर चिन्हा सान्ति के,होरी 'नन्द' सनेहि।।
कवि अरविन्द शर्मा जी ने होली पर्व की विशेषता इन शब्दों में बयां किया -
होली तो बस उसने खेली/ जिसने मन की गांठें खोली/ उपर से तन/ रंग लेने को /होली नहीं कहा करते हैं।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' जी ने सभी कवियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए राग-द्वेष से मुक्त होकर होली खेलने की बात कही -
हरियर ,पीयर , लाल, गुलाबी, रंगवा चटकील,
संग उड़ रहल रंग केसर गुलाल । फगुआ बा आइल, प्रेम रस घट ढरकाइल,
राग-द्वेष केहू के, ना रही मलाल।।
इस अवसर पर ढोल मंजीरे के साथ फगुआ गायन किया भाई अरविन्द 'अकेला' , अवधेश शर्मा 'नन्द' , बृजेश राय ने , संगत कर रहे थे अमरेंद्र श्रीवास्तव,संजय शर्मा और सारे कवि गण।
इस अवसर पर युवा कवि रत्नेश 'सृजन' को भागीरथी साहित्य प्रागल्भ्य पुरस्कार स्वरूप एक पुस्तक देकर सम्मानित किया गया।
जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है- सर्वश्री आचार्य ओम प्रकाश पांडेय, दानिका प्रसाद विश्वकर्मा, कुन्दन वर्मा 'पूरब' वेद प्रकाश, अरविंद 'अकेला', बृजेश राय, डा. सत्य नारायण 'पथिक', दीदार बस्तवी , सुधाकर साहनी, जय प्रकाश मल्ल, दयानंद त्रिपाठी 'व्याकुल' , बद्री विश्वकर्मा 'सांवरिया' , राम सुधार सिंह 'सैथवार' और अरुण ब्रह्मचारी, आनन्द वर्धन त्रिपाठी 'शनिल'आदि।
इस अवसर पर श्रोताओं में अमरेंद्र श्रीवास्तव, संजय शर्मा व डा.अमिताभ शर्मा एवं उनके परिवारी जन उपस्थित रहे।
सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संरक्षक श्री अरविन्द शर्मा जी ने कहा कवि देश और समाज की चिंता अपनी रचना के माध्यम से हमेशा करता रहता हैं।
