सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
मदिरा से समाज पर होने वाले दुष्प्रभाव से हमारे ऋषि -मुनि पहले ही परिचित थे। इन महापुरुषों ने सटीक विश्लेषण व अवलोकन कर हजारों वर्ष पूर्व ही शराब पीने से होने वाले कुप्रभाव को अंकित कर दिया था। शराब से होने वाली पतन की सारी कहानियां दर्ज कर दी थी! और समाज उन्हें झेल रहा है।
1- *हृदय विहीन झगड़ालू प्रवृत्ति*(Road Range Domestic violence)! शराबी व्यक्ति की हिंसक प्राकृतिक को स्पष्ट करते हुए ऋग्वेद (8/2/12) मे ऋषि कहते हैं।
*हृत्सु पितासो युध्यन्ते दुर्मदासो न सुरायाम।*
-जिस प्रकार बुराई से परिपूर्ण लोग आपस में लड़ाई करते हैं; उसी प्रकार शराब के नशे में चूर व्यक्ति भी लड़ाई झगड़ा करता है।
*तस्मात् सुरां पीत्वां रौद्रमना:*
अर्थात मदिरा पीकर व्यक्ति पाषाण हृदय वाला हो जाता है। वह सहानुभूति ,दया, करुणा आदि मानवीय भावो से विहिन हो जाता है।
तभी तो आज समाज में घरेलू हिंसा व वाहन चालकों द्वारा यातायात के दौरान हिंसक रोष व्यक्त करने के आंकड़ा मे भारी उछाल आया है। अंत: इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूरा मानव को असुर बनने का कार्य करती है और बसे बसाए घरो को उजाड़ देती है।
1- *पगलापन के हदे पार*(Extreme madness)!
ऋग्वेदी श्लोक (8/2/12) की दूसरी पंक्ति में मनीषी मधपान के दुष्प्रभाव को व्यक्त करते हुए कहते हैं- *ऊधर्न नग्ना जरन्ते*'-मधपान करने के बाद व्यक्ति अपनी सूद-बुध खो बैठता है। उसे अपने वस्त्रों तक का होश नहीं रहता। वह नग्न होकर पागलों के भांति बड़बड़ाता रहता है। शराबी पागलों की तरह बोलता है।
3- *पाप और अधर्म प्रवृत्ति*(Rise in Crime Rates)! हमारे महापुरूषों ने मदिरा को अधर्म की ओर उन्मुख करने वाली वस्तु का कहकर भी संबोधित किया।
*अनृतं पाप्पा तम: सुरा*
शतपथ ब्राह्मण (6/1/3/10/) अर्थात मदिरा पाप असत्य व तमस रूप है।
अंत: इसमें कोई संदेह नहीं है कि शराब की लत व्यक्ति को पापी अधर्मी व दुर्गाचारी बना देती है।
ऊपर लिखित तथ्यों को जानने के पश्चात आप समझ गए होंगे कि किस प्रकार हमारे वेदों में स्थान- स्थान पर मदिरा का खंडन किया गया है।
अंत: ब्रह्मिनिष्ट सद्गुरु द्वारा आत्मज्ञान प्राप्त करने के पश्चात ही व्यक्ति अमृत तुल्य रस का पान करता है और अपने परम लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। यही कारण है कि अमृत पान का सभी ग्रन्थों में इसका महिमा का गान किया गया है।
ॐ श्रीं आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
