दाना-पानी की आरजू लिए पिंजरे में कैद ज़िंदगी, एक परिंदे से उसका आसमान छीन लेती है।

 

                स्मृति शेष मां की ममता की छांव में, 

                          आयोजित कवि गोष्ठी

भागीरथी सांस्कृतिक मंच,गोरखपुर की 812 वी काव्य गोष्ठी संस्था प्रबंधक डा.सत्य नारायण 'पथिक' के आवास पर संपन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' जी ने व संचालन युवा कवि कुन्दन वर्मा 'पूरब' ने किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संस्था महासचिव वरिष्ठ कवि  बृजेश राय जी की वाणी वंदना से हुआ।

तत्पश्चात युवा कवि रत्नेश 'सृजन' ने व्यक्ति की स्वतंत्रता की बात ग़ज़ल के इस शेर से की -

दाना-पानी की आरजू लिए पिंजरे में कैद ज़िंदगी,

एक परिंदे से उसका आसमान छीन लेती है।

युवा कवि सुधाकर साहनी ने मां के प्यार की बात इन शब्दों में प्रस्तुत की -

अपना जीवन हवन कर देती है बच्चों के लिए,

मां के प्यार के जैसा कोई व्याकरण नहीं देखा।

मां के नेह व स्नेह की बात  इन शब्दों में बयां की वरिष्ठ दोहाकार भाई अवधेश शर्मा 'नंद' जी ने इन पंक्तियों में -

माई जस संसार में, ढूंढे ना मिली छोह,

 गहिरा सागर सात ले, पसरल इनके मोह।

वरिष्ठ भोजपुरी कवि भाई अरविन्द 'अकेला' ने  मां के दुलार की बात इन शब्दों में कही -

केहू माई जइसन बेटा के दुलार ना करि।

माई के अंचरा छाहे कवनो बेचारि का करि।।

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी ने लोगो को वेद एवं श्रुतियों की ओर लौटने की बात की  - 

वेदों का अभिज्ञान हो जीवन, श्रुतियों से उल्लासित हो जीवन।

सुख-दुख में सम्यक समभावी,सदा सार्थक आचार हो जीवन।।

इस अवसर पर 2नवम्बर 25 को सम्पन्न हुए वार्षिक साहित्य महोत्सव में उद्घोषित "गंगा प्रसाद भट्ट सम्मान 25" से वयोवृद्ध वरिष्ठ गीतकार श्री उमाशंकर चंद जी को सम्मानित किया गया।

तदुपरांत सभी ने संस्था प्रबंधक डा.सत्य नारायण 'पथिक' की माता जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना की।

जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है, सर्वश्री उमाशंकर चंद सुनील श्रीवास्तव 'राज', दानिका प्रसाद विश्वकर्मा,राम समुझ 'सांवरा',बद्रीनाथ विश्वकर्मा 'सांवरियां' , कुन्दन वर्मा 'पूरब', डा. सत्य नारायण 'पथिक' , बृजेश राय, सुरेंद्र 'मोड़', ज्ञानेश 'नापित', अरुण 'सदाबहार', कुमार अभिनीत, शंभू नारायण वर्मा, अरुण ब्रह्मचारी व राजीव रंजन मिश्र आदि।

अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था प्रबंधक डा.सत्य नारायण 'पथिक' ने।

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