*रडार*(RADAR)-Radio Detection and Ranging

          सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

इस तकनीक के द्वारा अंतरिक्षयानों की वास्तविक स्थिति ज्ञात हो जाती है।ऐसे वैज्ञानिक तकनीक का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के सुंदरकांड में किया है। बात उसे समय की है जब हनुमान जी, सीता जी की खोज में समुद्र को पार करते हुए जा रहे थे। तब उसका सामना समुद्र में निवास कर रही राक्षसी से होता है। उस राक्षसी द्वारा प्रयोग की गई माया का उल्लेख करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं-

*निसिचरि एक सिंधु महुं रहई।*

*करि माया नभ के खग गहई।।*

*जीव जंतु जे गगन उड़ाही*।

*जल बिलोंकि तिन्ह कै परिछाही*

              (मानस, सुंदरकांड२(१-२))

अर्थात समुद्र में एक राक्षसी रहती थी। वह माया करके आकाश में विचरण करते हुए पक्षियों को पकड़ लेती थी। वह उड़ते हुए जीव -जंतुओं की परछाई को जल में देखकर, उस परछाई को पकड़ लेती थी,जिससे वह उड़ नहीं पाते थे और जल में गिर पड़ते थे। राक्षसी कि माया में रडार तकनीक की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। 

अतः इन उदाहरण से स्पष्ट होता है कि हमारे ग्रंथो में वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ-साथ वैज्ञानिक तकनीको, उपकरणों का भी वर्णन किया गया है। यानी कि हमारे पुराणो ग्रन्थों और शास्त्रों में आध्यात्मिक रतन के साथ-साथ अनेक वैज्ञानिक रत्न भी निहित है। क्योंकि उनके रचयिता वे आध्यात्मिक पुरुष थे जिनमे पुर्ण विवेक प्रकाशित था।

ॐ श्री आशुतोषाय नमः 

श्री सियाबिहारी जी ✍️

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