कार्यक्रम में पधारे साहित्यकार बंधु
भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 813 वी काव्य गोष्ठी बेतिया हाता स्थित सर्वांग हास्पिटल के सभागार में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व कृतकार्य आचार्य प्रो. आर. डी. राय रहे , विशिष्ट अतिथि द्वय श्री दीप शर्मा जी,नाट्य प्रमुख दर्पण नाट्य संस्था,गोरखपुर व श्री अरविन्द शर्मा जी संरक्षक भागीरथी सांस्कृतिक मंच,गोरखपुर रहे।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार श्री सौदागर सिंह जी, अध्यक्ष, भागीरथी सांस्कृतिक मंच गोरखपुर ने किया व संचालन डा.सत्य नारायण 'पथिक'ने किया।
प्रथम सत्र में वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी की पुस्तक "लोकनाट्य शैली- नौटंकी" पर विद्वानों ने चर्चा की।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मां वाग्देवी की प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित करने एवं डा.सत्य नारायण 'पथिक' द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से हुआ।
प्रथम सत्र में "लोकनाट्य शैली- नौटंकी" के लेखक श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी ने पुस्तक लेखन से जुड़े संदर्भ प्रस्तुत किया। तत्पश्चात श्री दीप शर्मा जी ने पुस्तक पर अपनी बात रखी - नौटंकी शैली के नाटकों का का मंचन विलुप्त होता जा रहा है।इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है , पर जोर दिया।
इसी क्रम में श्री अरविन्द शर्मा जी ने अकिंचन जी के पुस्तक के संदर्भ में कहा कि यह पुस्तक "भोजपुरी नाट्य शैली विशेषकर नौटंकी परम्परा पर एक शोध पूर्ण और प्रमाणिक दस्तावेज है। इसके लिए अकिंचन जी को कोटिश: साधुवाद।
मुख्य अतिथि प्रो.आर.डी.राय ने लेखक अकिंचन जी की प्रशंसा करते हुए कहा कि नौटंकी की पुनर्वापसी पर जोर देने वाली पुस्तक"लोकनाट्य शैली- नौटंकी" वास्तव में प्रशस्य है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री सौदागर सिंह जी ने काव्य समीक्षा करते हुए कहा -
बहुत विशद व्यापक वर्णन बा,कहले में न आई।
कहबो करिहें तो कहिए सकिहे सिर्फ "अकिंचन" भाई।।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' जी ने की व संचालन किया युवा कवि एवं संस्था सचिव भाई कुन्दन वर्मा 'पूरब' ने।
फिल्म अभिनेता एवं वरिष्ठ कवि श्री राजकुमार सिंह जी ने सत्ता की बेरुखी पर तंज करते हुए कहा -
जिंदा हैं जो चुप ही रह गए मुर्दे बोल पड़े।
सत्ता के गलियारों के सब वादे बोल पड़े।।
मानवीय संवेदनाओं पर अपनी बेबाक टिप्पणी की वरिष्ठ गीतकार डॉ. जय प्रकाश नायक जी ने -
सबसे ख़तरनाक है यारो, आंखों का पानी मर जाना।
ख़तरनाक मरघट सी चुप्पी,मन का संवेदन हर जाना।
वरिष्ठ कवयित्री डा.प्रतिभा गुप्ता जी ने सपनों की बात की -
सपनों ने यदि हकीकत का रूप/ नहीं लिया/ तो भी कोई बात नहीं/ सपनों से भरे चंद लम्हों/ ने मन को रोशन किया/ ये क्या कम बड़ी बात है ?
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' जी ने मानव मन के दृढ़ता की बात की -
भाव चेतना और मनुज मन , ये सदय हृदय से बढ़ता जीवन।
दृढ़ता मन की कर्म कुशलता, वर्धन करता चलता ये जीवन।।
अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किये उनके नाम है श्रीमती श्रीमती कमलेश मिश्रा,बिंदू चौहान,डा.सरिता चौहान,आशिया गोरखपुरी, वंदना सूर्यवंशी एवं सर्वश्री विनय मितवा, सुधाकर साहनी,राम समुझ 'सांवरा' , जय प्रकाश मल्ल, राघवेन्द्र मिश्र, अवधेश शर्मा 'नन्द' ,राम सुधार सिंह 'सैथवार' , मिन्नत गोरखपुरी, तन्हा गोरखपुरी , महमूद भाई, कुन्दन वर्मा 'पूरब', डा.सत्य नारायण 'पथिक' वागीश्वरी प्रसाद मिश्र "वागीश" आदि।
श्रोताओं में प्रो.अंगद सिंह,अजय श्रीवास्तव, डा.एस .एन.सिंह व अन्य हास्पिटल स्टाफ आदि उपस्थित रहे।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था के प्रबंध निदेशक डा. ए.पी. गुप्ता जी ने।
