* *किशोरो को अध्यात्म का आधार दें* *

       सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

किशोरों की शिक्षा में परा व अपरा विद्या का समन्वय होना चाहिए। ताकि विद्यालयो से प्राप्त विद्या उन्हें न केवल बाहरी ज्ञान दें, बल्की दोष रहित, सभ्य  जीवन जीने के गुर भी सिखाए।

स्वामी दयानंद सरस्वती जी के अनुसार 'वास्तविक शिक्षा वही है, जिससे सभ्यता, संस्कृति, धर्मात्मा, जितेन्द्रियता में वृद्धि हो।'

ड्यूक ऑफ़ वेलिंग्टन 

कहते हैं - "Educate man without religion and you Make them but clever devils"._लोगों को धर्म विहीन शिक्षा देना, उन्हें चतुर शैतान बनाने जैसा है। 

स्वामी विवेकानंद जी धर्म की महत्ता स्पष्ट करते हुए कहते हैं -"Take religion from humen society and what will remain? Nothing but a forest of Brutes"धर्म के अभाव में मानव समाज में क्या रह जाएगा? पशुओं से भरे जंगल का अतिरिक्त कुछ भी नहीं!

विद्वान बुन्सेन लिखते हैं -"Culture of intellect, without religion in the heart, is only civilized barbarism and disguised animalism ."

हृदय में धर्म का अभाव हो, ऐसी बौद्धिक क्षमता केवल एक शब्द जंगलीपन और प्रच्छन पशुता है।

सारत: यदि आज के पथभ्रष्ट किशोरो को सही राह पर लाना है, तो उन्हें आध्यात्मिक से संस्कारित करना होगा। इसलिए दिव्या ज्योति जागृति संस्थान बच्चों, किशोरों युवाओं व उनके अभिभावकों का आह्वान करता है -'आइए! शास्त्र सम्मत, शाश्वत ध्यान पद्धति-ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर धर्म के गुणों का धारण कीजिए! अपनी ऊर्जा को दिव्यता का आधार दीजिए! ताकि एक स्वस्थ व सुंदर समाज की रचना हो सके!'

ॐ श्री आशुतोषाय नमः 

श्री सियाबिहारी जी ✍️

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