जिंनगी दुख अउरी , सुख के कहानी हवे । कब्बों खउलत , कब्बों शीतल पानी हवे।।

 

               कवि गोष्ठी में शामिल साहित्यकार जन 

               काव्य पाठ करते वरिष्ठ साहित्यकार 

श्रीराम जियावन दास 'बावला' जी की 104वी जयंती भागीरथी सांस्कृतिक मंच गोरखपुर की 814वी काव्य गोष्ठी के  रूप में 1जून 26को संस्था संरक्षक श्री अरविन्द शर्मा जी के आवास पर उल्लासपूर्वक मनाया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार श्री वीरेन्द्र मिश्र 'बिरही' जी ने एवं संचालन डा.सत्य नारायण 'पथिक'ने किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अध्यक्ष एवं कवियों के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा एवं श्री राम जियावन दास 'बावला' जी  के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

मां वाग्देवी की वंदना प्रस्तुत किया संस्था महासचिव वरिष्ठ कवि श्री बृजेश राय जी ने।

जिंदगी की एक नई परिभाषा दिया युवा कवयित्री श्रीमती शशि पाण्डेय बिट्टो ने  -

जिंनगी दुख अउरी , सुख के कहानी हवे ।

कब्बों खउलत , कब्बों शीतल पानी हवे।।

प्रसिद्ध वरिष्ठ भोजपुरी गीतकार श्री सुभाष यादव जी ने इस मानव जीवन के नश्वरता की ओर इशारा करते हुए कहा -

रहि जाई धरती, आकाश, हवा, पानी।

आगे पीछे सभे चलि जाई गुनिया गेयानी।।

संस्था संरक्षक व कवि श्री अरविन्द शर्मा जी ने अपनी रचना में सत्य को उद्धृत करते हुए कहा -

सत्य अकेला हो सकता है , लेकिन वह कमजोर नहीं ।

झूठ भले  सौ रूप बदल लें, सच की कोई तोड़ नहीं।।

संस्था के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'  जी ने श्री राम जियावन दास 'बावला' के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कवियों को आगाह किया कि कविता उनका एक अस्त्र है जिसके जरिए वह अपनी बात जनता और समाज तक पहुंचा सकते हैं -

काव्यमय जीवन हमारा, वाणी में सदा ही सत्य हो।

धर्म से रक्षित रहे हम और कविता हमारा अस्त्र हो।।

अध्यक्षता कर रहे हैं वरिष्ठ गीतकार श्री वीरेंद्र मिश्र 'बिरही' जी ने अपनी रचना के द्वारा भोजपुरी के श्लाका पुरुष श्री राम जियावन दास 'बावला' जी को नमन किया -

जे मानदंड स्थापित बा, ओकर कृतज्ञता ज्ञापित बा।

ए भोजपुरी माटी में त राउर जस कीरति थापित बा।।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है - सर्वश्री बागीश्वरी  प्रसाद मिश्र 'वागीश' , दानिका प्रसाद विश्वकर्मा, महमूद भाई, तन्हा गोरखपुरी, विनय मितवा , राम सुधार सिंह सैथवार, निर्मल कुमार गुप्त 'निर्मल' , बृजेश राय, डॉ. सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज' , आचार्य ओम प्रकाश पांडेय, अवधेश शर्मा 'नंद' , अरविंद 'अकेला' , निरंकार शुक्ल 'साकार' , सुधाकर साहनी, प्रेमनाथ मिश्र , डा. सत्य नारायण 'पथिक' , राम समझ सांवरा , आनंद वर्धन त्रिपाठी 'शनिल' , अजय कुमार यादव आदि।

इस अवसर पर श्रोताओं में श्री ओम नारायण विश्वकर्मा, डा .अमिताभ शर्मा जी एवं उनका पूरा परिवार उपस्थित रहा।

अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था संरक्षक श्री अरविंद शर्मा जी ने।

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