*केवल पूर्ण गुरु की शरणागत होकर ही ईश्वर को पाया जा सकता है!*

          सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

हमे अध्यात्म भी समझाना चाहता है। हमारे शास्त्र ग्रंथ स्पष्ट करते हैं कि मनुष्य ईश्वर का दर्शन अपने घट के भीतर कर सकता है। पर हममे  से अधिकतर लोग नहीं कर पा रहे । हम ग्रन्थों को पढ़ते हैं; मंदिर -तीर्थ पर जाते हैं, व्रत -नियम रखते हैं; पूजा- हवन करते हैं; योग - प्राणायाम करते हैं; एकाग्रता को बढ़ाने की कई साधना  पद्धतियां अपनाते हैं; दान -पुण्य करते हैं... इत्यादि‌। पर फिर भी हमें परमात्मा का दर्शन नहीं हो पता। इससे  यही निष्कर्ष निकलता है हम कहीं -न कहीं  जरूर गलत कनेक्शन कर रहे हैं। 

फिर सही कनेक्शन क्या है? ब्रह्मज्ञान  ! 

संतों ने शास्त्र - ग्रन्थों मे अपनी वाणियां दर्ज करके यह साफ बताया कि ईश्वर- दर्शन का सही तरीका क्या है। सभी ग्रंथ एकमत होकर कहते हैं- केवल पूर्ण गुरु की शरणागत होकर ही ईश्वर को पाया जा सकता है। सद्गुरु ब्रह्मज्ञान प्रदान कर  साधक का आज्ञा -चक्र जागृत कर देते हैं। जब इस आज्ञा चक्र पर   साधक  अपने मन को एकाग्र करता है, तब होता है दर्शन। '

डिजिटल साइंस की भाषा में कहे, तो ' जागृत आज्ञा चक्र' है,'पोर्ट' और 'साधक का मन  'तार'  जब यह तार पोर्ट से जुड़ती है तब होता है सही कनेक्शन।  तब होता है साधक को अपने अंतर- जगत में ईश्वर- दर्शन। इसलिए ग्रन्थों की मदद से इस सत्य को जानकर एक पूर्ण गुरु से ब्रह्मज्ञान   को प्राप्त करे।और जीवन भर गलत कनेक्शन करने की भूल न करें। 

ॐ श्री आशुतोषाय नम:

           श्री सिया बिहारी जी✍️

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