अश्क से छिलते नयन है, शब्द ढकते आह के , हम गिरे पत्ते है,बिन पतझड़, किसी के राह के !

                   गोष्ठी में शामिल साहित्यकार जन

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 815 वी काव्य गोष्ठी प्रबंधक  डा.सत्य नारायण 'पथिक'के गीता वाटिका स्थित आवास पर सम्पन्न हुई।

काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री वागीश्वरी प्रसाद मिश्र 'वागीश'जी ने की व संचालन युवा कवि कुन्दन वर्मा 'पूरब'ने किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ गीतकार श्री अरविन्द 'अकेला' द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वंदना से हुआ।

वरिष्ठ गीतकार शम्भू नारायण ने जीवन की व्यथा से बोझिल व्यक्ति के अश्रुपूरित नयन सब कह देते हैं को गीत में प्रस्तुत किया -

अश्क से छिलते नयन है, शब्द ढकते आह के ,

हम गिरे पत्ते है,बिन पतझड़, किसी के राह के !

भाई राम समुझ 'सांवरा'जी ने बादलों को याद किया जेठ बीत रहा है और रोपनी शुरू हो गई है,अब तो बरस जाओ-

बदरा तुहरे बांटे असरा -

बिन पानी के धान झुराता!

आके बरसा दस लहरा ---

वरिष्ठ कवि श्री अरविन्द शर्मा जी ने जीवन का दर्शन प्रस्तुत किया इस गीत के माध्यम से -

राह तो बड़ी सीधी है, मोड़ तो सारे मन के है!

पग-पग पर जो भ्रम बिखरे हैं,सब अपने चिंतन के है!!

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार श्री वागीश्वरी प्रसाद मिश्र 'वागीश' जी ने सभी को साधुवाद देते हुए तात्कालिक परिस्थिति जन्य मौत पर टिप्पणी करते हुए यह ताजा तरीन गीत पढ़ा -

ऐ जहां है, जहा नागिन भी हसी होती है।

अब तो हर मौत के पीछे कोई प्यार नजर आता है।।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किये उनके नाम है - श्रीमती वंदना सूर्यवंशी और सर्व श्री सुरेन्द्र 'मोड़' , अरविन्द 'अकेला',डा.सत्य नारायण 'पथिक', दीदार बस्तवी, कुन्दन वर्मा 'पूरब', राघवेन्द्र मिश्र,दानिका प्रसाद विश्वकर्मा आदि।

वरिष्ठ कवि विनय मितवा के पिता जी स्मृति शेष कुंवर बहादुर श्रीवास्तव   का स्वर्गवास दो दिन पूर्व हो गया था। उनके निधन से आहत साहित्य परिवार के सभी कवियों ने दिवंगत आत्मा की शान्ति हेतु दो मिनट का मौन रखा।

आये सभी कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया डा.सत्य नारायण 'पथिक' ने।


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