सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
अक्सरा हम अपने जीवन में ऐसे दौर से गुजरते हैं, जब कुछ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं तो हमारा मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए अग्रसर होते हैं, तो परिस्थितियों विपरीत हो जाती है। ऐसा लगता है की समस्त संसार हमारे विरुद्ध हो गया है। हम यह सोचकर निराश -हताश होने लगते हैं की सभी दिशाएं हमें आगे बढ़ने से रोक रही है। हर ओर प्रतिकूलता ही प्रतिकूलता है।पर क्या ये प्रतिकूलताएं सच में हमारे राहों की बाधक है? क्या संघर्षमय स्थितियां हमें गिराने आती हैं?
जो हमें लगता है या दिखता है, वैसा शायद है नहीं। जीवन का सत्य इससे बहुत गुढ़ है।
जब हम अपने जीवन के उच्च लक्ष्य को पाने की ओर अग्रसर होते हैं, जो हमारा सामना भी 'संघर्ष' से होता है। जो हमारा मार्ग बाधित करता है। ऐसा लगता है हमारी गति थम गई। आगे बढ़ाना नामुमकिन है। परंतु यदि हम आत्मविश्वास व दृढ़ता से पथ पर बढ़ते रहते हैं, तो जीवन में 'संघर्ष' जैसा बिंदु या मुकाम भी आता है जब जटिलताएं कम होने लगती है। ऐसा नहीं है कि ये जटिलताएं या समस्याएं शून्य हो जाती है। नहीं! यह हमेशा किसी न किसी रूप में विद्यमान तो रहती ही हैं, लेकिन 'चरैवेति -चरैवेति 'का मंत्र उन समस्याओं पर सवार हो जाता है और हमारा जीवन गतिमान होता है। पर यहां समझने वाली बात है कि इन कष्टो व कठिनाइयों के अभाव में हमारी यात्रा भी अपूर्ण है और आगे बढ़ना भी अधूरा है। क्योंकि यह जटिलताएं ही हमें पकाती है। मार्ग पर सतर्क होकर बढ़ाना सिखाती है। हमारी क्षमताओं और सामर्थ्य को बढ़ाती है। जब हम एक बार इन समस्याओं को पार कर जाते हैं, तो सफल योद्धा के रूप में अपना साक्षात्कार कर पाते हैं।
स्वामी विवेकानंद जी ने यह पंक्तियां इसलिए कही थी-'in a day, when you don't come across any problem, you can be sure that you are travelling on the wrong path... Arise, awake and stop not until your goal is achieved'
अर्थात जब तक अपने जीवन में कठिनाइयों से सामना ना हो, तो यह समझ जाना कि आप गलत मार्ग पर बढ़ रहे हैं।... इसलिए उठो, और तब तक मत रुको जब तक की अपने लक्ष्य को पूर्ण कर लो।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
