गरीबी देना गर तो रिश्तेदार मत देना। कष्ट पर कष्ट यूं परवर दिगार मत देना।

 

                  कवि गोष्ठी में आमंत्रित साहित्यकार जन

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 817 वी काव्य गोष्ठी संस्था महासचिव वरिष्ठ कवि श्री बृजेश राय जी के आरोग्य नगर स्थित आवास पर सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भाई बृजेश राय जी द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वन्दना से हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार श्री वीरेन्द्र कुमार मिश्र "विरही' जी ने किया और संचालन संस्था सचिव भाई कुन्दन वर्मा 'पूरब'जी ने किया।

वरिष्ठ ग़ज़लकार भाई निरंकार शुक्ल 'साकार' जी ने गरीबों की बात इस शेर के माध्यम से की -

गरीबी देना गर तो रिश्तेदार मत देना।

कष्ट पर कष्ट यूं परवर दिगार मत देना।

वरिष्ठ ग़ज़लकार सृजन गोरखपुरी जी ने भूख की बात ग़ज़ल के माध्यम से यूं की-

भूख ने इस तरह सताया है,

 फूल को फावड़ा थमाया है।

 जल गए होनहार के सपने, 

पेट की आग ने जलाया है।

वरिष्ठ कवि श्री अरविंद शर्मा जी ने मोहब्बत की परिभाषा कुछ इस तरह की-

धड़कनों में उतर रही है तुम्हारी मोहब्बत,

 खामोशी भी कह रही है तुम्हारी मोहब्बत। 

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार श्री वीरेंद्र कुमार मिश्र "विरही'  जी ने देश की दशा पर टिप्पणी करते हुए यह गीत प्रस्तुत किया जिसकी पंक्तियां है-

'विरही' यह मुर्दों का देश,

जाति-पाति में अझुरायों,

निसदिन करत कलेश।


अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया भाई बृजेश राय जी ने।

1 Comments

  1. साकार जी रिश्तेदारों से बहुत परेशान लगते है

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