सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
एक बार तीन मित्र थे- ज्ञान ,धन और विश्वास। किसी परिस्थिति बस उन्हें अलग होना पड़ा। अब सवाल यह था कि यदि मिलने की इच्छा हुई तो कहां मिलेंगे? 'ज्ञान' ने कहा कि मैं विद्यालयों और धार्मिक स्थलों में मिलूंगा। 'धन'ने कहा मैं अमीरों के पास मिलूंगा। 'विश्वास 'चुपचाप खड़ा रहा। पूछने पर रोते हुए कहा, अगर एक बार में चला गया, तो फिर कभी नहीं मिलूंगा।
अर्थात- 'विश्वास एक बेशकीमती भाव है,जिसे हृदय में सहेज कर रखना, क्योंकि यह शरणागति का एक बेहतरीन तराना है, जो कभी अनसुना नहीं रहता।'
तुम पर जो विश्वास हमारा वो दुगुना कर देना,
अपने उजले हाथों से मन को उजाला कर देना,
मैं कर्मों का मैला आंचल तेरे सामने लाया हूं।
🌹ॐ श्री आशुतोषाय नमः 🌹
श्री सिया बिहारी जी✍️
