सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
गुरु भक्ति पथ का तो यह अटल नियम है-जो शिष्य मन में संकल्प की लौ जगा लेता है और हाथों में धैर्य के मसाला थाम लेता है-सफलता उसके अस्तित्व और व्यक्तित्व को सदा के लिए रोशन कर देती है।
एक साधक शिष्य को धैर्य का हाथ थाम लेना चाहिए! एक चीनी कहावत है-'धैर्य का एक पल हमें तबाह होने से बचा सकता है, अधीरता का एक पल हमें बर्बादी के कगार पर खड़ा कर सकता है'। शिष्य के लिए तो सबसे बडी बर्बादी यही है, जब अधीर होकर अपने गुरु के आदर्शों व सिद्धांतों को छोड़ बैठता है। इसलिए धैर्य रखकर खुद को, अपने शिष्यतत्व को तबाह होने से बचाए रखें। चाहे कितनी ही कठिन परिस्थितियों का सामना क्यों न करना पड़े; चाहे कितने ही विरोधो व जख्मो की पीड़ा क्यों न सहनी पड़े; चाहे कितना ही पुरुषार्थ क्यों न करना पड़े; चाहे कितनी बार असफलता का मुख क्यों न देखना पड़े; चाहे मंजिल तक पहुंचने के लिए कितना ही इंतजार क्यों करना पड़े;-धैर्य बनाए रखें। सतगुरु और उनके दरबार को, उनके ब्रह्मज्ञान-मार्ग को छोड़ने का पाप न करें। इसलिए साधको ! गुरु- पथ पर स्वयं को टीकाये रखना.. अपना धैर्य बनाए रखना।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️

उत्कृष्ट विचार है।
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