सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
"रामचरितमानस " में कितने चरित्र हैं-एक से एक चरित्रवान, एक से एक शक्तिमान, एक से एक बुद्धिमान, एक से एक त्यागी भी है। लेकिन अनोखी बात यह है कि इन सारे चरित्र में पूजा के अधिकांश मंदिर तो केवल दो के ही बने हैं-श्री राम के और हनुमान जी के। क्योंकि सीता जी श्री राम की पत्नी थी, इसलिए उनके साथ मंदिर में सीता जी भी हैं। अन्यथा दुर्गा और काली मां के जैसे स्वतंत्र मंदिर सीता जी के नहीं है। लक्ष्मण को भी कहीं- कही मंदिरों में स्थान मिला क्योंकि वह श्री राम के साथ वन गए थे। हालांकि लक्ष्मण जी को शेषनाग के अवतार माना गया है। फिर भी भारतीयों ने उनको अलग से कोई मंदिर नहीं बनाए, शायद एकाध अपवाद को छोड़कर। क्योंकि अलग से मंदिर बना तो केवल हनुमान जी का। मंदिर बन गया तो ठीक है, नहीं बना तो मड़ई में हनुमान जी को बैठा दिया।
पूर्ण गुरु (ईश्वर )से अपने लिए की जाने वाली दैनिक प्रार्थना में आप इसे भी अनुवाद रूप में शामिल कर लें कि-हे ईश्वर मुझे सेवक की भावना का संचार करके उसे दिन प्रतिदिन दृढ़ बनाता जा। तू बस इतना कर दे। बाकी तो मैं खुद कर लूंगा, क्योंकि तूने मुझे सारी चीज दे रखी है। जिसे कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है।
हनुमान जी ने अपने पूर्ण गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर , सेवा, सुमिरन,साधना गुरु दर्शन हमेशा यही किया, और यही करने से वह सफल हो सके, आप भी कर सकते हैं। आपके अंदर आस्था और विश्वास होना चाहिए, मैं भी कर सकता हूं। क्योंकि हनुमान जी बंदर से मानव नहीं, सीधे भगवान बन गए।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
