*बरगद वृक्ष पूजन के पीछे वैज्ञानिक करण छिपे हैं, इसलिए भारत के संस्कृतिक पूर्वजों ने स्त्रियों के लिए बरगद वृक्ष के इर्द-गिर्द परिक्रमा करने की प्रथा बनाई।*

          सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

इस पृथ्वी पर मात्र बरगढ़ एक ऐसा वृक्ष है,  जो सूर्य के प्रकाश में सबसे अधिक ओजोन छोड़ता है।  यह ओजोन एक स्त्री के गर्भ को उर्वरता को बढ़ाती है। जब नवविवाहित स्त्रियां मेरी छाया में आती है, तो उनकी सांसों के द्वारा यह ओजोन उनके युटेरस (uterus) तक पहुंचती है। उनकी फैलोपियन ट्यूब्स (fallopian tubes), जिसमें पुरुष के शुक्राणु ग्रहण किए जाते हैं, ओजोन के प्रभाव से सशक्त होती है। उन्हें गर्भधारण करने में सहायता मिलती है‌। इसे बरगद वृक्ष के परिक्रमा करके पूरा किया जाता है। इस प्रक्रिया पीछे भी एक विज्ञान है। गोल- गोल घूमकर परिक्रमा करने से फेफड़ों को अधिक कार्य करना पड़ता है। इससे वह अधिक ओजोन अपने भीतर खींच लेते हैं। 'अधिक ओजोन' मतलब 'अधिक लाभ'! इसलिए भारत के संस्कृतिक पूर्वजों ने स्त्रियों के लिए मेरे परिक्रमा करने की प्रथा बनाई। सभी वर्ग की स्त्रियां इस वैज्ञानिक लाभ को प्राप्त कर सके, इसलिए उन्होंने इस क्रिया को एक धार्मिक रंग दिया। पूर्णमासी के दिन, गुरुत्वाकर्षण बल के कारण, मेरा यह ओजोन प्रभाव सबसे अधिक होता है। इसलिए इस परिक्रमा पूजन के लिए विशेष कर यही दिन अति उत्तम हैं।

ॐ श्री आशुतोषाय नमः 

श्री सियाबिहारी जी ✍️

Post a Comment

Previous Post Next Post