भगवान् श्री नारायण ने भागवत कथा सृष्टि के आदि में ब्रह्मा जी को सुनाया। ब्रह्मा जी ने अपने मानस पुत्र नारद को सुनाया। महर्षि नारद ने वेदव्यास को सुनाया। वेदव्यास ने अपने पुत्र शुकदेव जी को सुनाया।
कालांतर में श्वेत वाराह कल्प के २८ वें महायुग के अंतिम चौथे युग कलियुग के ३०वर्ष बीतने पर श्री शुकदेव जी ने भाद्र पद माह, शुक्ल पक्ष,९तिथि को हरिद्वार में गंगा तट पर अभिशप्त हस्तिनापुर नरेश परीक्षित को सुनाया। कलियुग के २००वर्ष बीतने पर गोकर्ण ने प्रेतयोनिप्राप्त अपने भाई धुंधकारी को आषाढ़ माह , शुक्ल पक्ष,९ तिथि को सुनाया।
कलियुग के २३०वर्ष वीतने पर हरिद्वार में गंगातट पर सनत्कुमारादि ने कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष,९ तिथि को नारद, भक्ति ,सूतजीआदि को १८०००श्लोक तथा १२ स्कंध वाला श्री मद्भागवत महापुराण कथाको सुनाया।
वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में स्थित नैमिषारण्य क्षेत्र में एक त्र ८८००० शौनकादिऋषि -मुंनियों के १०००वर्षीय यज्ञ में महा तपस्वी सूत जी ने ऐसा बताया ।
प्रस्तुतकर्ता
डाक्टर हनुमान प्रसाद चौबे
गोरखपुर।
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