श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 820वीं काव्य गोष्ठी संस्था संरक्षक श्री अरविंद शर्मा जी के आवास पर मनाई गई।यह जानकारी संस्था के अध्यक्ष सत्यनारायण विश्वकर्मा पथिक ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
गोष्ठी में पधारे साहित्यकार जन जिसकी,भागीरथी साहित्य प्राग्ल्भय पुरस्कार से सम्मानित करते कार्यक्रम अध्यक्ष राम सुधार सिंह सैथवार एवं अन्य जन
कार्यक्रम का विधिवत संचालन संस्था प्रबंधक डॉ. सत्य नारायण 'पथिक' ने किया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री राम सुधार सिंह सैथवार जी ने की। कवयित्री श्रीमती वंदना सूर्यवंशी जी ने मां सरस्वती वंदना की संगीतमय प्रस्तुति दी।
तत्पश्चात युवा कवयित्री प्रगति गुप्ता ने श्री कृष्ण से यह प्रार्थना की -
आज जन्मदिन है तुम्हारा,
एक अरदास है मेरे मन की।
जहां अंधेरा हो सबसे गहरा,
वहां उजाला बन कर आ जाना।
युवा कवि दयानंद त्रिपाठी 'व्याकुल' ने श्री कृष्ण को पुनः धरती पर आ जाने की पुकार लगाई -
आओ मोहन! फिर धरा पर प्रेम की गंगा बहाएं,
आज फिर मन में उतरती तेरी छवि मुस्कुराए।
वरिष्ठ कवि श्री अवधेश शर्मा 'नंद' जी ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की-
हाथ जोरि बिनती करी, यदुनंदन सरकार,
किरिपा के बरखा करी, सुखी रहे संसार।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि श्री राम सुधार सिंह सैथवार जी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कुछ इस तरह से किया-
यमुना के तट पर वंशी की धुन लगे प्यारी-प्यारी,
कदंब की छैया में सूरत लगे कान्हा की न्यारी-न्यारी!
सोहे सिर मोर मुकुट ,आंखन से प्रेम झरे ,
देखि-देखि गोपी सब सुध-बुध गंवाती जाती वारी-वारी!!
अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है -श्रीमती वंदना सूर्यवंशी, श्रीमती निशा पासवान
एवं सर्वश्री अरविंद 'अकेला' , अरविंद शर्मा ,डॉ.सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज' , बृजेश राय, डॉ. सत्य नारायण 'पथिक' , सुधाकर साहनी, अनिल त्रिपाठी 'शनिल' आदि।
इस अवसर पर भाई अवधेश शर्मा 'नंद' एवं अरविंद 'अकेला' जी ने भजनों की संगीतमय प्रस्तुति दी तथा युवा कवयित्री सुश्री प्रगति गुप्ता को उनके बेहतरीन काव्य पाठ के लिए "भागीरथी साहित्य प्राग्ल्भय पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।
श्रोताओं में श्री अमरनाथ ओझा, श्री पुरुषोत्तम मद्धेशिया, श्री मृत्युंजय शर्मा एवं उनके परिवारीजन आदि उपस्थित रहें।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्री अरविंद शर्मा जी ने कहा जगत के अधीश्वर भगवान श्री कृष्ण अजन्मा है, परंतु यह उनकी लीला ही है, जो हम सब उनके जन्मदिन को बड़े ही उत्साह से मनाते हैं।आप सभी कवि यहां आकर के आप सभी ने जो श्री कृष्ण लीलाओं का रसपान कराया है,उससे हम सभी धन्य-धन्य हैं।


एक कविता में मेरे विचार से संशोधन जरूरी था सो किया गया है,जहाँ कृष्ण बन कर आने की जगह उजाला बन कर आने को लिखा गया है मेरे खयाल से यही उचित होगा।
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