*सब पर बराबर दया*

           सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

भगवान कहते हैं -

*अखिल बिस्व यह मोर उपाया। सब पर मोहि बराबरि दाया॥*

यह सारा विश्व मेरा ही बनाया है, इसलिए सब पर मेरी बराबर दया है।

> *मानव, पशु, पक्षी, लता, पादप, कीट, पतंग।*

> *सबमें प्रभु नित बस रहे, सब ही उनके अंग।*

हर जीव में परमात्मा का अंश है। बाइबल में भी कहा है - *God has made man in his own image.* इसलिए इंसान का धर्म है ताकि वह सब जीवों से प्रेम करे और उनकी रक्षा करे। और आपस में उच्च नीच का भेदभाव खत्म कर,  असहाय जीवो की सेवा करें। क्योंकि भूखे का भोजन करना और असहाय का सेवा करना सबसे बड़ी धर्म है।

हर पशु में कोई न कोई गुण है। एक बार एक शिष्य ने आचार्य सुश्रुत से कहा - जोंक में क्या गुण है? वह तो खून चूसती है।

सुश्रुत जी ने एक घाव वाले रोगी के घाव पर जोंक लगवाई, उसने सारी गंदी मवाद चूस ली। और कहा - देखो, परमात्मा की कोई रचना बेकार नहीं।

पर आज इंसान अपने स्वाद के लिए जीवो को बेरहमी से मार रहा है और उसके मांस का भक्षण  कर रहा है। जब इंसान पर पर कोई आपदा आती है तो घड़ियाल आंसू निकलता है और ईश्वर को याद करता है। कहावत है- जो बोयेगा वही कटेगा।

यही इंसान के साथ होगा। जीवों पर अत्याचार ही आज भूकंप, सुनामी जैसी आपदाओं का कारण बन रहा है। अगर आपको आपदाओं से बचाना है तो एक बात गांठ बांध लो, जीवो पर दया करो और ईश्वर को हमेशा याद करो!

*भगवान ने हमें रक्षक बनाया है, भक्षक नहीं।*

 *ॐ श्री आशुतोषाय नमः*

श्री सियाबिहारी जी ✍️

नोट:- लेख का उद्देश्य किसी को हानि अथवा ठेस पहुंचाना नहीं है।लेख, लेखक के अपने विचार है इसमें प्रकाशक की सहमति आवश्यक नहीं है।

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