*संस्कृत प्रहेलिका-* *सरल या जटिल!*

         सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा


*अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातात-*

*सम्पूज्यकान्तापितृशिरोवहा*

उपरलिखित पहेली को बूझो तो जानें। क्या हुआ? सिर चकरा गया!

यह पद संस्कृत भाषा में प्रचलित नियम 'समास' का अद्वितीय उदाहरण है। समास में दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) को जोड़कर विभक्तियों का लोप कर संक्षिप्त वाक्य बनाया जाता है, जिसका कोई अर्थ हो। इस पहेली में कुल 21 पद सम्मिलित हैं।

आइए, इस अद्भुत पहेली को सुलझाने के लिए पहले इसे पदों में विभाजित करते हैं-

*अहि-रिपु-पति-कान्ता-तात-सम्बद्ध-कान्ता-हर-तनय-निहन्तृ-प्राणदातृ-ध्वज-सखि-सुत-सुत-कान्ता-*

*तात-सम्पूज्य-कान्ता-पितृ-शिरोवहा*

सबसे पहले प्रथम पद से आरम्भ करते हैं। फिर क्रमानुसार एक-एक करके पहले पद से दूसरे पद को जोड़ते हुए संयुक्त पद के अर्थ को समझते चलते हैं। इस प्रकार बड़ी आसानी से हम इस पहेली को बूझ पाएँगे।

अहि: = साँप

अहिरिपु: = गरुड़ (साँप का शत्रु)

अहिरिपुपति: = विष्णु (गरुड़ के स्वामी)

अहिरिपुपतिकान्ता = लक्ष्मी (श्रीविष्णु की पत्नी)

अहिरिपुपतिकान्तातात: = समुद्र (लक्ष्मी के पिता)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्ध: = राम (समुद्र को बाँधने वाले)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ता = सीता (श्री राम की पत्नी)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहर: = रावण (सीता को हरने वाला)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनय: = मेघनाद (रावण का पुत्र)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्ता = लक्ष्मण (मेघनाद को मारने वाला)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदाता = हनुमान (लक्ष्मण को प्राण देने वाले)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वज: = अर्जुन (जिसके ध्वज पर हनुमान हों)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखा = श्रीकृष्ण (अर्जुन के सखा)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुत: = प्रद्युम्न (श्रीकृष्ण के पुत्र)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुत: = अनिरुद्ध (प्रद्युम्न के पुत्र)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्ता = उषा (अनिरुद्ध की पत्नी)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातात: = बाणासुर (उषा के पिता)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातसम्पूज्य: = शिव (बाणासुर के इष्ट देव)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातसम्पूज्यकान्ता = पार्वती (भगवान शिव की पत्नी)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातसम्पूज्यकान्तापिता = हिमालय (पार्वती के पिता)

अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातसम्पूज्यकान्तापितृशिरोवहा = गंगा (हिमालय से निकलने वाली)

तो पहेली का उत्तर है- *गंगा।* है न कमाल! सभी भाषाओं में एक मात्र संस्कृत भाषा में ही यह विशेषता है कि इसमें एक साथ दूसरे शब्द को जोड़कर नवीन से नवीन और अनंत शब्दों का निर्माण किया जा सकता है। साथ ही, इसमें प्रत्येक शब्द के साथ जुड़े शब्द को परिभाषित करने में सहायक भी होता है। संस्कृत भाषा के अलावा किसी अन्य भाषा में शब्दों की इतनी और अनूठी तारतम्यता देखने को नहीं मिलती।

तो अब क्या कहेंगे आप! यह रोचक पहेली सरल है या फिर जटील?

*ॐ श्री आशुतोषाय नमः*

श्री सियाबिहारी जी ✍️

नोट:- लेख का उद्देश्य किसी को हानि अथवा ठेस पहुंचाना नहीं है।लेख, लेखक के अपने विचार है इसमें प्रकाशक की सहमति आवश्यक नहीं है।




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