सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

           *सभी जनों को होली महापर्व की हार्दिक बधाई*

            श्री आर सी सिंह जी रिटायर्ड एयरफोर्स ऑफिसर

होली एक पवित्र एवं आनंददायक त्यौहार है, लेकिन कुछ मनचले कहते हैं-'बुरा न मानो होली है।' अरे वाह! इसमें बुरा मानने की क्या बात है, जबकि होली एक पवित्र त्यौहार है।क्योंकि वो मनचले इस पवित्र होली को बुरा बना देते हैं, और फिर कहते हैं- 'बुरा न मानो होली है।'

     होली बुरा तब बन जाता है, जब लोग होली को वीभत्स बना देता है।ग्रीस के साथ रंग,तेल के साथ रंग, रासायनिक पदार्थ के साथ कीचड़ आदि मिलाकर होली खेलते हैं।मांस मदिरापान करके सार्वजनिक स्थान पर कुकर्म करता है।जनमानस को परेशान करता है।तो होली बुरा बन जाता है।और फिर कहता है कि 'बुरा न मानो होली है।'

     होली का अर्थ होता है- हो ली।कौन किसकी हो ली? हमारे धार्मिक ग्रंथो में कथा आती है।हिरण्यकश्यपु अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को कई प्रकार से प्रताड़ित कर चुके थे।और फिर अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि में नहीं जलने का वरदान था) कि गोद में बिठाकर अग्नि में जलाने का प्रयास किया।लेकिन होलिका जल गई और परमात्मा की कृपा से प्रह्लाद बच गया।और अन्त में भगवान ने भक्त को अपना लिया।यानि भक्त की आत्मा परमात्मा की हो ली।और तभी से इस होली की परंपरा को हम सभी मनाते आ रहे हैं।

   अतः आप सभी से अनुरोध है कि इस होली को Happy Holi की तरह मनाएं ना कि दुर्गत होली की तरह।और इसी के साथ आप सभी को Happy Holi.

 *ॐ श्री आशुतोषाय नमः*

RC Singh.7897659218.

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