ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल गुरु की शरणागति होना पड़ता है। *सुश्री कालिंदी भारती जी*

 

   सुश्री कालिंदी भारती जी श्रद्धालुओं को संबोधित करती हुई

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का अनुष्ठान किया गया है। कथा के द्वितीय दिवस में परम पूजनीय सर्व श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी ने चतुर्थ स्कंध् के अंर्तगत बालक ध्रुव की गाथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि ध्रुव की बालक अवस्था है लेकिन वो प्रभु से मिलने की उत्कंठा लिए वन में जाकर तपस्या करनी शुरु कर देता है। जहाँ पर उसकी भेंट नारद जी से होती है जो उसको ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर घट के भीतर ही ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन करवा देते हैं। आज मानव भी प्रभु से मिलने के लिए तत्पर है लेकिन उसके पास प्रभु प्राप्ति का कोई भी साधन नहीं है। हमारे समस्त वेद-शास्त्रों व धार्मिक ग्रन्थों में यही लिखा गया है कि ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल गुरु की शरणागति होना पड़ता है। गुरु ही शिष्य के अज्ञान तिमिर को दूर कर उसमें ज्ञान रूपी प्रकाश को उजागर कर देता हैं। उन्होंने कहा कि जब भी एक जीव परमात्मा की खोज में निकला है तो वह सीधे परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर पाया। गुरू ही है जो जीव और परमात्मा के मध्य एक सेतु का कार्य करता हैं। परमात्मा जो अमृत का सागर है किंतु मानव उस अमृतपान से सदा वंचित रह जाता है। पिपासु मनुष्य तक मेघ बनकर जो अमृत की धरा पहुंचाता है वह सद्गुरू है। सद्गुरू से संबंध् हुए बिना ज्ञान नहीं हो सकता। गुरू इस संसार सागर से पार उतारने वाले हैं और उनका दिया हुआ ज्ञान नौका के समान बताया गया है। मनुष्य उस ज्ञान को पाकर भवसागर से पार और कृत कृत हो जाता है। कथा के मुख्य यजमान श्री पुष्पदंत जैन उपाध्यक्ष व्यापारी कल्याण बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार, श्री राजेश तुलस्यान, श्री विनोद गुप्ता व शैलेश कुमार गुप्ता सपरिवार, श्री अनिल कुमार शर्मा परिवार सहित  उपस्थित रहे। कथा में मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रदीप शुक्ला,विधायक सहजनवा,

डॉ आलोक पांडे ,पूर्व सी.एम. ओ, श्री अमरीश मल्ल ,श्री प्रभात राय जी,श्री राम कुमार सिंह,श्री कुंवर सिंह,तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में योगी शोम नाथ गोरखनाथ मंदिर ने फूलों की माला सुश्री साध्वी जी को हस्तगत करा कर सम्मानित किया ।

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