सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
श्री आर सी सिंह जीएक बार की बात है, संत मार्टिन लूथर ने धर्म के नाम पर प्रचलित अनेक रूढ़ियों के विरुद्ध जन -जागरण अभियान चलाया। इससे चिढ़कर कुछ रूढिवादियों ने उन पर निराधार आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने का काम शुरू कर दिया। एक दिन संत लूथर के एक मित्र ने उनसे कहा आप, अच्छी बातों का प्रचार किया करें। पुरानी बातों पर प्रहार कर बेकार में ही अपना विरोध क्यों बढ़ा रहे हैं? तब उन्होंने जवाब दिया- मैं धर्म प्रचारक हूं। धर्म के नाम पर फैल रहे अधर्म रूपी पाप का मूकदर्शक बनकर भी तो मैं परमात्मा का विरोध सहन करूंगा। इस से अच्छा है कि इन गलत मार्ग पर चलने वालों का विरोध झेलूं , अंत में उन्हें चुप होना ही पड़ेगा। जब संत लूथर को पाखंडियों ने ज्यादा सताना शुरू किया तो एक शिष्य ने कहा- अब तो हद ही हो गई है। जब आपकी प्रार्थना भगवान सुनते हैं तो आप क्यों नहीं ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह इन पाखंडियों को दंडित करें। यही नही, इनकी जीभ को लकवा मार जाए। तब संत लूथर ने जवाब दिया- मैं प्रतिदिन भगवान से प्रार्थना करता हूं कि इन भ्रमित लोगों को सद्बुद्धि दीजिए, उन्हें पाखडं के मार्ग से हटाकर सच्चे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दीजिए। यदि मैं उनका बुरा चाहूंगा तो फिर मुझ में और उन में अंतर क्या रहेगा? अक्सर ऐसा होता है कि जब हम धर्म के मार्ग पर चलते हैं तो हमारे परिवार के सदस्य या हमारे मिलने जुलने वाले कई तरह की बातें बनाते हैं, हमें पथ से विचलित करने का भरसक प्रयास करते हैं। परंतु हमें इनको कोई जवाब नहीं देना बल्कि अपनी भक्ति को दृढ़ता देनी है। एक दिन अवश्य ऐसा आयेगा जब इनको अपनी गलती का एहसास होगा। क्योंकि यदि हम भी इनकी तरह बुरा व्यवहार करें तो सच में इनमें और हममें क्या फर्क रह जाएगा। इसलिए निर्भीक हो कर ईश्वर के मार्ग पर आगे बढ़ते रहें।
*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*
"श्री रमेश जी"
