सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
हम सभी के जीवन में कभी- कभार कुछ ऐसे पल आते हैं, जब हम स्वयं को बिल्कुल असहाय पाते हैं। हमारी सारी योग्यताएं, प्रतिभाएं, क्षमताएं, उपलब्ध साधन सब धरे के धरे रह जाते हैं। हमारे द्वारा अर्जित धन, बुद्धि, बल ,सारे सहारे बेअसर दिखते हैं। माने सब कुछ होते हुए भी हम विवस महसूस करते हैं। ठीक जैसे बंदूक के सामने खड़े निहत्थे व्यक्ति की तरह आंख मुद कर मृत्यु को अपना भाग्य मान लेते हैं। अक्सर ऐसी परिस्थितियों में हम हार मान लेते हैं। मौत आने से पहले ही मर जाते हैं। कुछ लोग तो आत्महत्या तक का विकल्प चुन लेते हैं।
पर ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें आत्मरक्षा के लिए अंधेरे में भी रास्ता ढूंढना चाहिए। हाथ पर हाथ रखकर पराजय स्वीकार करने की अपेक्षा दिमाग के घोड़े दौड़ाने चाहिए। हर ओर हाथ पैर मारना चाहिए। क्या पता कोई छोटा सा, साधारण सा विकल्प ही हमारे हाथ लग जाए और हमारे लिए सफलता के दरवाजे खोल दे। कोई छोटी सी युक्ति ही संजीवनी साबित हो जाए। इसका प्रयोग करके हम स्वयं को भी गौरवान्वित कर जाए और इतिहास के लिए भी एक गौरव का पृष्ठ अंकित कर पाए।
इसीलिए कैसी भी परिस्थिति हो, हार नहीं माने। उससे जुझने का निरंतर प्रयास करते रहे। कवि सोहनलाल द्विवेदी के इन शब्दों को अपने हृदय में स्थान दें-
*लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती।*
*कोशिश करने वालों को कभी हार नहीं होती*। ।
ॐ श्री आशुतोषाय नम:
श्री सियाबिहारी✍️
