**आध्यात्मिक टेलिपैथी**

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

अर्थात, आत्मा का आत्मा से संवाद। यानि, जहाँ सीधा आत्मा के स्तर पर वार्ता होती है, जहाँ भाषा की कोई भूमिका नहीं होती। जहाँ होता है केवल समाधान और आनंद।कल्याण ही कल्याण।

   आध्यात्मिक टेलिपैथी को अपनी भाषा में रखते हुए महर्षि रमण कहते हैं- भक्ति की चुप्पी में आत्म सत्य का प्रभाव निहित है।

  आज के विज्ञान ने सैरिब्रम (मस्तिष्क के ऊपरी भाग) को 'स्लीपिंग विशालकाय' का लेबल दिया है, क्योंकि इसका बड़ा भाग सुषुप्त है, सो रहा है। परंतु विज्ञान यह भी मानता है कि सैरिब्रम में वह केन्द्र है, जो केवल अध्यात्म द्वारा ही जागृत किया जा सकता है। पूर्ण गुरु ही इस केन्द्र, यानी पीनियल ग्लैन्ड को ब्रह्मज्ञान के द्वारा सक्रिय बनाते हैं। सनातन धर्म में इसे ही 'तीसरे नेत्र का खुलना' कहते हैं। इसके खुलने से व्यक्ति परम सत्ता का साक्षात्कार करता है।तब ही शुरुआत होती है, शिष्य के आध्यात्मिक टेलिपैथी कर पाने की।विज्ञान इस केन्द्र को जागृत कर पाने में अक्षम रहा है, तभी वह इस टेलिपैथी से कोसों दूर है।

   जैसे जैसे शिष्य ब्रह्मज्ञान की साधना करता है, वह आध्यात्मिक टेलिपैथी में निपुण होता जाता है। दर असल, सेरेब्रल कारटेक्स चेतना की विभिन्न जानकारी को इकट्ठा करता है। जब यह कारटेक्स स्थिर होता है, तब वह चेतना के उच्च आयामों के साथ जुड़कर आध्यात्मिक टेलिपैथी कर सकता है।अत: जब साधक ध्यान में स्थित होता है, तब कारटेक्स स्थिर होता है। वहाँ आत्मा ही वक्ता होती है और आत्मा ही श्रोता।

   पर सावधान! संशय इस टेलिपैथी की सबसे बड़ी रुकावट है। विज्ञान के अनुसार संशय के कारण हमारे एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिसके कारण मस्तिष्क में एक न्यूरॉन पिट्यूट्री ग्रंथि से पीनियल ग्रंथि तक घूमता है। यह न्यूरॉन आध्यात्मिक संपर्क को तोड़ देता है और हम आध्यात्मिक टेलिपैथी के आनंद को ग्रहण करने में फेल हो जाते हैं। इसलिए साधकों, गुरुदेव से सदा संबंध बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ध्यान साधना करें। तभी आप उनके दिव्य संदेशों को प्राप्त कर पाएंगे। अपनी प्रार्थनाएं उन तक पहुंचा पाएंगे। यानि आध्यात्मिक टेलिपैथी संभव हो पाएगी।साथ ही, कभी भी संशय को न आने दें। क्योंकि इससे आध्यात्मिक टेलिपैथी नष्ट हो जाती है।

**ओम् श्रीआशुतोषाय नमः**

"श्री रमेश जी"

Post a Comment

Previous Post Next Post