*धैर्य*

           सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा

सोचो कैसे होता अगर आज हम स्कूल में दाखिला लेते और कल ही डॉक्टर या इंजीनियर बन जाते हैं! आज बीज बोते और कल ही खेतों में बड़ी-बड़ी फसल लहलहाने लगती। घर से निकलते और निकलते ही ऑफिस पहुंच जाते.... रास्ते में कोई लाल बत्ती न होती! सचमुच, तब जिंदगी कितनी सुपरफास्ट होती ! पर हकीकत में ऐसा नहीं होता! धैर्य, सब्र, इंतजार- ये जिंदगी के अटूट हिस्से हैं। आप चाहे तो भी इन शब्दों को अपने जीवन के शब्दकोश से हटा या मिटा नहीं सकते। मंजिल की ओर बढ़ेंगे, तो रास्ते में लाल बत्तियां तो आएगी ही और हमें उन पर रुकना भी पड़ेगा। ठहरेंगे नहीं, हरी बत्ती होने तक का सब्र नहीं रखेंगे, तो फिर दुर्घटना के अंजाम को भी भुगतना पड़ेगा। 

  पर हाँ रुकने- रुकने में फर्क है। जीवन में ठहरने का मतलब हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाना नहीं है। धैर्य न तो निष्क्रियता का पर्याय है, न ही निखट्टुपन का! धैर्य का अर्थ है, एक ऐसा इंतजार जिसके साथी है - परिश्रम, सकारात्मक ऊर्जा, अटूट विश्वास, प्रेम, दृढ़ संकल्प! 

     सांसारिक व्यक्ति हो या भक्ति के पथ पर चलने वाला शिष्य, चाह को धैर्य की राह पर चलना आवश्यक है। और जहां लक्ष्य के प्रति चाह हो, साथ ही साथ धैर्य की राह हो- वहां हार हो जाए - ऐसा कैसे संभव है? इसलिए लक्ष्य को पाने का जुनून जगाएं रखना! अपना धर्य बनाए रखना! 

ॐ श्री आशुतोषाय नम :

श्री सियाबिहारी✍️

Post a Comment

Previous Post Next Post