सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
साधना में रत रहो, हे साधकों हर क्षण सभी,
नवयुग की प्रभात तुम, देख पाओगे तभी।
विषय विकारोंकी नदियों में,
स्नान करना छोड़ दो,
तृष्णाओं पर लगाकर अंकुश, मनकी दिशा को मोड़ दो।
हो अमृत की संतान तुम, मत भूलो यह सत्य कभी,
नवयुग की प्रभात तुम, देख पाओगे तभी।
स्वयं का परिवर्तन ही, विश्वशांति का आधार है,
प्रभु चिंतन में मग्न रहो, हर चिंता निराधार है।
न हो विलम्ब, हो शुभारंभ, नव निर्माण का अभी,
नवयुग की प्रभात तुम, देख पाओगे तभी।
आशुतोष की दृष्टि से, कदाचित नहीं तुम दूर हो,
है सामर्थ्यवान वो, फिर तुम क्यों मगरूर हो?
उनकी आज्ञाओंका अनुसरण, करने का प्रण करलो अभी,
नवयुग की प्रभात तुम, देख पाओगे तभी।
**ओम् श्रीआशुतोषाय नम:**
"श्री रमेश जी"
