कार्तिक पूर्णिमा : आस्था, दान और देव दीपावली का पावन संगम।

                              दुर्गेश मिश्र

हिंदू धर्म में कार्तिक मास का अत्यंत विशेष महत्व है। इस माह की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है, जिसे देव दीपावली, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था, और देवताओं ने तारकासुर के तीन नगरों (त्रिपुरासुर) का नाश कर इस दिवस को “देवों की दीपावली” के रूप में मनाया था।

धार्मिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य का विशेष विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, नर्मदा और अन्य पवित्र नदियों के तटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

कथाओं के अनुसार, इस दिन देवता स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर गंगा तट पर दीपदान करते हैं, इसलिए इसे देव दीपावली कहा जाता है। वाराणसी में यह पर्व विशेष भव्यता के साथ मनाया जाता है, जहां लाखों दीप गंगा तट को आलोकित करते हैं।

दान और पूजन की परंपरा

इस दिन तुलसी, भगवान विष्णु और भगवान शिव का पूजन विशेष फलदायक माना गया है। देव दीपावली की रात घरों, मंदिरों और घाटों पर दीप जलाने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है —

> “कार्तिके पूर्णिमायां तु यः स्नानं कुरुते नरः।

सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते॥”

दान का भी इस दिन विशेष महत्व है — अन्न, वस्त्र, दीप, घी, तिल, स्वर्ण या भूमि दान का पुण्य अक्षय माना गया है।

आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक महोत्सव है। इस दिन अनेक तीर्थों, मंदिरों और आश्रमों में भजन-कीर्तन, कथा-पूजन, और दीपमालाओं के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। सामाजिक एकता, सद्भावना और पर्यावरण संरक्षण का भी यह संदेश देता है कि प्रकाश से अंधकार का नाश करो और मानवता की ज्योति जलाओ।

निष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा का पर्व धर्म, आस्था और संस्कार का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्चे अर्थों में दीपावली तब होती है जब हम अपने भीतर के अंधकार — अहंकार, लोभ और ईर्ष्या — को दूर कर सत्य, ज्ञान और करुणा का दीप जलाते हैं।

विशेष लेख – संवाददाता दुर्गेश मिश्र



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