*भव्य कलश यात्रा के साथ बीबीपुर में श्रीमद् भागवत कथा एवं विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ।*

 

                          कार्यक्रम की झलकियां

बाराबंकी। जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर स्थित ब्लॉक सिद्धौर की ग्राम सभा  बीबीपुर में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा एवं विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है। 2 नवंबर से 8 नवम्बर तक आयोजित 7 दिवसीय कथा से पूर्व गाजे-बाजे, झाँकियों के साथ सम्पूर्ण गाँव का पीत वस्त्रों में सर पर कलश धारण करके सैकड़ों महिलाओं ने भ्रमण करते हुए कलश यात्रा निकाली। 

आयोजन स्थल से शुरू होकर कलश यात्रा माँ दुर्गा मन्दिर बीबीपुर पहुंचकर पूजन-अर्चन किया। तत्पश्चात, कथा के पण्डाल में कलश यात्रा का समापन हुआ। उपरोक्त कार्यक्रम भगवती प्रसाद सोनी व श्रीमती विजयलक्ष्मी सोनी के संयोजन में संपूर्ण ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित किया गया है। 

सायंकाल प्रवचन पण्डाल में चिन्मय मिशन लखनऊ के संस्थापक परम पूज्य कौशिक चैतन्य जी महाराज के मुखारबिंद से अमृतमयी वाणी में श्रीमद्भागवत कथा का संगीतमय लहरी में रसपान कराया गया। टोली में आये राजकुमार(गायक), चंदन शुक्ला(वादक), रोहित मिश्रा (आर्गन), सुरेश तिवारी(तबला वादक), द्वारा 'राधा तेरे चरणों की,थोड़ी धूल जो मिलजाए,, सच कहता हूँ राधे, तकदीर बदल जाए’, भजन प्रस्तुत करके पण्डाल में मौजूद श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। 

सायंकाल अमृतवाणी रूपी कथा का रसपान कराते हुए व्यास पीठ पर विराजमान कौशिक चैतन्य जी महाराज ने ज्ञान, वैराग्य,भक्ति का वर्णन करते हुए प्रभु के चरणों में भक्ति हेतु प्रेरित किया। श्री व्यास जी ने नाम, रूप, गुण और ध्यान का सम्यक दर्शन के रूप में श्री मद् भागवत महात्म्य बताया। कथा व्यास ने कहा कि आज आश्रमों में पाखण्ड फैल गया है, तीर्थ होटल बन गए हैं, देशकाल में परिस्थितियों के चक्र के कारण तीर्थ की प्राचीनता, दिव्यता, भव्यता मिटती जा रही है। आज लोगों की प्रवृत्ति भोग की ओर बढ़ रही है। गुरु-शिष्य की परम्पराएँ तार-तार हो चुकी है।ऐसे विषम परिस्थितियों में वास्तविक सच्चे गुरु का वरण करके आध्यात्मिक जीवन जीना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि भागवत केवल ग्रंथ मात्र नहीं है, जो भगवान का हो गया वही भगवत है। जो मनुष्य के हृदय में भगवान को स्थापित कर दे, वही भागवत है। 

जिसके अंदर आनंद की अनुभूति हो, उसे ही भगवान कहते हैं। कथा एक आडंबर नहीं है। बिना भगवान की कृपा के आपको जीवन में सच्चे संत नहीं मिलते हैं, 'मिले कोई संत फकीर, लगादे दरिया के तीर'। दुःख को दूर करने के लिए,भगवद् प्राप्ति के लिए कथा का श्रवण किया जाता है। भागवत के परिणाम से अनुष्ठान से व्यक्ति के मनोरथ पूर्ण होते हैं। अनियंत्रित मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। आत्मदेव नामक ब्राह्मण की कथा का रसपान कराकर श्रोताओं को भक्ति के लिए प्रेरित किया। 

भागवत का विश्लेषण करते हुए बताया कि भ से भाव, ग से ज्ञान, व से वैराग्य तथा त से तर जाना। 

उन्होंने कहा कि अपने घरों में बच्चों को संस्कार दें, कार न खरीद कर दें। जैसा माता पिता करते हैं, वैसा ही परिवार में बच्चे अनुश्रवण करते हैं।

प्रातःकाल यज्ञ शाला में कलश देवता, नवग्रह देवता का आह्वाहन करके सैकड़ों महिलाओं-पुरुषों को हवन कराया गया। हवन करने के लिए बीबीपुर, माँदुपुर, मिर्जापुर, जैदपुर, कोठी, उस्मानपुर,सिद्धौर, सहित दर्जनों गाँव के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उक्त आयोजन को सफल बनाने में विनय सोनी, विकास सोनी, राजेश कुमार सोनी, गोपाल सोनी, गौरव सोनी, मोनू सोनी, सहित सभी सोनी परिवार, ग्रामीणों के परिजन प्राण पण से जुटे हुए हैं।

                          उमाकांत बाजपेई, 

                            मीडिया प्रभारी

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