भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 804 वी काव्य गोष्ठी वरिष्ठ चित्रकार एवं कवि श्री राज राजेश्वर सिन्हा 'अनुरागी' जी के इंद्रप्रस्थ पुरम आवास पर संपन्न हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ छंदकार एवं गीतकार श्री अवधेश शर्मा 'नंद' जी ने किया एवं संचालन डा .सत्य नारायण 'पथिक' ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ भोजपुरी गीतकार श्री अरविंद 'अकेला' जी द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ।
युवा कवि सुधाकर साहनी ने मन की पीड़ा को इन पंक्तियों में व्यक्त किया -
मन की आंखों से तुम कभी देखा तो करो,
मैं मौन होकर भी दिल का दर्द सुना देता हूं।
प्रेम में असफल प्रेमी की बात को अपने शब्दों में बयां किया युवा कवि राघवेंद्र मिश्र ने -
अब है संशय में डूबा सारा जगत,
प्रेम को हल बनाना नहीं चाहता।
कर रहे भावनाओं का व्यापार सब,
कोई रिश्ता निभाना नहीं चाहता।।
वरिष्ठ चित्रकार एवं कवि भाई आर.आर.सिन्हा 'अनुरागी' ने आज के हालात और जज्बात पर यह पंक्तियां उकेरी -
अंदर खाने /बहुत कुछ बदल रहा है आज!
गुम हो रहे हैं /सभी जज्बात भी आज!!
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार अवधेश शर्मा 'नंद ' जी ने समय और विधाता द्वारा जो भविष्य तय किया गया है उस पर टिप्पणी करते हुए यह कहा -
रंक कबो राजा बने, राजा बने फकीर।
समय फेर जस खींचि दे,मनई माथ लकीर।।
अन्य कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है - श्रीमती वंदना सूर्यवंशी , श्रीमती बिंदू चौहान,अरविंद 'अकेला' डा .सत्य नारायण 'पथिक' आदि ने।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया वरिष्ठ चित्रकार भाई आर. आर. सिन्हा 'अनुरागी' ने।
