**संतों के कड़वे वचन भी सिर्फ हमारे कल्याण के लिए ही होते हैं।**

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।


हम कई बार यह कहते हैं कि शास्त्र ग्रंथों में लिखे गए वचन इंसान को डराते हैं।संतों ने अनेक बार बहुत कड़वे वचन बोले हैं। जैसे कबीर जी कहते हैं--

"कबीर गाफिल क्यों फिरै, क्या सोता घनघोर।

 तेरे सिराहने जम खड़ा, ज्यूँ अँधियारे चोर।।"

   मतलब- 'हे इंसान, तू क्यों (माया की) गहरी नींद में सोया रहता है? तेरे सिरहाने तो हमेशा यम खड़ा है, जैसे अंधेरे में चोर खड़ा रहता है।'

   संतों ने ऐसे नकारात्मक वचन क्यों बोले? क्योंकि वे जानते थे कि व्यक्ति को प्यार की भाषा इतनी आसानी से नहीं समझ आती। यदि उसे सतर्क करना है तो उसे उसकी हानि के बारे में बताना होगा।

    संत एकनाथ के पास एक व्यक्ति आया करता था। उसे वे कहा करते थे, 'भाई! तुम क्यों अपना जीवन व्यर्थ गँवा रहे हो?प्रभु की भक्ति करो!' पर वह व्यक्ति उनकी बातों को अनसुना कर देता था। वह कहता था- 'मेरे पास इतना काम है कि मुझे समय नहीं मिलता।'

    एक दिन जब वह व्यक्ति एकनाथ जी के पास आया, तो वे उससे बोले, 'मुझे दिख रहा है कि तुम अगले सात दिनों में से किसी एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।' उस व्यक्ति ने जैसे ही यह सुना, वह कांप गया।उसने संत को कहा- 'मैं मरने से पहले, कुछ पल के लिए ही सही, पर ईश्वर की भक्ति करना चाहता हूँ। 'यानी वह अध्यात्म की ओर अग्रसर हो गया। पूरी भावना के साथ ईश्वर का नाम स्मरण करने लगा। उसे उसमें आनंद भी आने लगा। पश्चाताप भी था- 'पहले मैंने संत जी की बात क्यों नहीं सुनी? यदि सुन लेता, तो पूरी उम्र ईश्वर की भक्ति का रसपान करता।'

   यूँ ही करते करते सात दिन बीत गए। पर उसकी मृत्यु तो हुई ही नहीं। उसने एकनाथ जी से कारण जानना चाहा- 'आप तो इतने महान संत हैं। फिर आपकी बात असत्य कैसे हो गई।' तब एकनाथ जी ने कहा- 'असत्य कहाँ हुई? मैंने कहा था- तुम सात दिनों में से किसी एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।और ऐसा होगा ही। तुम्हारी मृत्यु सोमबार से लेकर रविवार तक के सातों दिनों में से किसी एक दिन ही होगी।...'

   अतः यह सूत्र हमें अध्यात्म के दृष्टिकोण से यह सिखाता है कि संतों के कड़वे वचन भी सिर्फ हमारे कल्याण के लिए ही होते हैं।

**ओम् श्री आशुतोषाय नमः**

"श्री रमेश जी"

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