भागीरथी सांस्कृतिक मंच,गोरखपुर द्वारा आज नववर्ष एवं कविवर कामता प्रसाद रसविंदु जी की 111वी जय कविवर कामता प्रसाद रसविंदु जी की 111वी जय जरंति संस्थान अशोक नगर ( दक्षिणी) बशारतपुर, गोरखपुर में 805वी विशिष्ट काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.चितरंजन मिश्र, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष,दी.द.उपा.गोरख्पुर विद्वर ने की , एवं मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि वागीश्वरी प्रसाद मिश्र 'वागीश' , पूर्व प्रधान प्रबंधक,उ.प्र.चीनी निगम, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रेम प्रकाश शर्मा, महासचिव,अ. एवं श्री अरविन्द शर्मा, संरक्षक, भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर रहे।
पूरे कार्यक्रम का संचालन डा.सत्य नारायण 'पथिक'एवं श्री अजय यादव ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती, भगवान् विश्वकर्मा जती को मालकामरी प्रसाद रसविंदु जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं सभी कवियों ने रसविंदु जी को पुष्पांजलि अर्पित किया।
तत्पश्चात वरिष्ठ गीतकार भाई हरे कृष्ण पांडेय जी द्वारा मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई।
तदुपरांत भोजपुरी संगम के संचालक एवं वरिष्ठ गीतकार कुमार अभिनीत ने सभी को नये साल की बधाई इदेद
मन में हजारन गो सपना फुलाइल,
दू हजार छब्बीस नया साल आइल।
वरिष्ठ भोजपुरी गीतकार अरविंद 'अकेला'जी ने नये साल पर चुटकी ली -
कांपता देहि थर-थर,हाल त बेहाल बा,
कवना तरे कह ताड़ऽ ,आइल नवका साल बा।
वरिष्ठ गीतकार आदरणीय श्री सुभाष चन्द्र यादव जी ने सभी को नये साल की बधाई इन शब्दों में दी -
बहरा शांति बनवले राखी, घर में केतनो दंगल होखे।
ईश्वर से बा इहे निहोरा,सगरो दूर अमंगल होखे।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्री वागीश्वरी प्रसाद मिश्र 'वागीश' जी ने मां को याद इन शब्दों में किया
के माई बिनु कोरा में उठाई हमके,
के जादू टोना,आंखि से बचाई हमके।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. याद करने का एक अवसर निकाला। उन्होंने के पहले ही दिवंगत हो गये थे। वास्तव में कविता नए और पुराने कवियों के बीच एक सेतु बनाती है। अतीत को व्यतीत नहीं होने देती और कवि अतीत को बार-बार सामने लाता है। कविता भाषा के अवमूल्यन से हमें बचाती है। इसलिए कविता और कवि दोनों ही महत्वपूर्ण है।
अन्य जिन लोगों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है - श्रीमती बिंदु चौहान, श्रीमती वंदना मिश्रा, अव 'धेनि श'वर्कमा ,विनय मितवा, हरे कृष्ण पांडे, दयानंद त्रिपाठी 'व्याकुल' राघवेंद्र मिश्रा, अजय यादव, सुधाकर साहनी, महमूद भाई एवं डा . सत्य नारायण 'पथिक' आदि ने।
इस अवसर पर रसविंदु परिवार के सभी लोग उपस्थित रहे। श्रोताओं में विश्वकर्मा सेवा संस्थान के पदाधिकारी गण उपस्थित रहे।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया वरिष्ठ एडवोकेट भाई वीरेन्द्र शर्मा रसविंदु जी ने।

