सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
किन्तु सफल व्यक्ति कभी भी इस प्रभाव का अनुसरण नहीं करते। बल्कि वे इससे बिल्कुल विपरीत व्यवहार करते हुए जीवन की ऊँचाइयों को छूते हैं। दूसरों के प्रति सहिष्णु रहें और स्वयं के साथ सख्ती से पेश आएँ। माने कि हमेशा दूसरों को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देना चाहिए। उनकी गलतियों के प्रति उदार भाव रखना चाहिए। हर छोटी बात पर उन्हें कटघरे में खड़ा करने की आवश्यकता नहीं है। यदि उनकी गलती किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाने वाली, तो उसे तूल न दें। हल्के में जाने दें।
पर स्वयं की हर छोटी से छोटी गलती पर पैनी दृष्टि रखें। अपनी किसी भी त्रुटि को मजबूरी का नाम न दें। भूल से हुई भूल को भी सुधारने और दोबारा न दोहराने का संकल्प लें। तभी आप अपने जीवन में उच्चता को प्राप्त कर पाएँगे।
**ओम् श्री आशुतोषाय नम :**
"श्री रमेश जी"
