**हर पल सुमिरन से बँधे रहें **

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

सामने बैठे शिष्यों को सुमिरन का महत्व समझाते हुए योगानंद जी बोले - 'जब तुम अपने पालतू कुत्ते को नहलाते हो, तो बहुत अच्छे से साबुन लगाकर उसे साफ करते हो। पर अगर नहलाने धुलाने के बाद तुम उसे बाँधते नहीं, तो वह क्या करता है? वापिस मिट्टी में जाकर, उसमें लोट पोट होकर अपने आप को गंदा कर लेता है।

  इस मन की भी यही कहानी है। ध्यान साधना से मन की मलिनता धुलती है। अवांछित चिंतन, ऊलजुलूल विचारों और नकारात्मक भावनाओं की गंदगी साफ होती है। मन स्वच्छ और उजला बन जाता है। साधना के बाद इस धुले हुए, साफ मन को सुमिरन की चेन से बाँधकर रखना बहुत ज़रूरी है। नहीं तो, यह भी इधर-उधर भागकर फिर से नकारात्मकता की धूल मिट्टी खुद पर चढ़ा लेता है।'

**ओम् श्री आशुतोषाय नम :**

"श्री रमेश जी"

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