*शरीर परमात्मा का मंदिर है!*

      सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा.

जिस प्रकार माचिस की तिल्ली तोड़ने से अग्नि प्रकट नहीं होती, बल्कि रगड़ से यानी एक युक्ति लगाने से होती है। उसी प्रकार देह में समाए ईश्वर को प्रकट करने के लिए भी एक युक्ति चाहिए।    परमात्मा का साम्राज्य तुम्हारे भीतर है

𝓑𝓸𝓭𝔂 𝓲𝓼 𝓽𝓱𝓮 𝓽𝓪𝓶𝓹𝓵𝓮 𝓸𝓯 𝓵𝓲𝓿𝓲𝓷𝓰 𝓖𝓸𝓭. 

शरीर परमात्मा का मंदिर है। यदि हम महापुरुषों को वाणी पर थोड़ा गहन विचार करें तो पाएंगे की सभी ने यही कहा है कि चाहे वह परमात्मा सर्वव्यापक है, सृष्टि के कण-कण में है, किंतु जिस किसी ने भी उसका दर्शन किया तो कहीं बाहर नहीं प्रयुक्त अपने शरीर के भीतर ही किया। हम इन चर्म चक्षुओं के द्वारा परमात्मा को नहीं देख सकते। उसे केवल दिव्य चक्षु के द्वारा अपने भीतर ही देखा जा सकता है। इसलिए आज तक जिस किसी ने भी ईश्वर को पाया उसने अंतःकरण में ही पाया है। वास्तव में मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, गिरजाघर, इत्यादि मनुष्य के भीतर स्थित धार्मिक स्थल की ओर संकेत करते हैं।बाहृय  धार्मिक स्थल  तो मात्र प्रतीक है। यह शरीर रूपी मंदिर परमात्मा ने स्वयं बनाया है और इस मंदिर के अंदर जिस किसी ने भी ढूंढा ,उसे मायूस नहीं होना पड़ा। जिस जगह से हरि की प्राप्ति होती है, वही हरि का मंदिर है अर्थात परमात्मा का घर है। इसलिए उस ईश्वर को बाहर ढूंढने की बजाय भीतर ही ढूंढो ।यही उसका निवास स्थान है। यह तन  प्रभु का मंदिर है ,और वह ईश्वर अनंत ज्योति के रूप में इसी के भीतर निवास करता है। जो पूर्ण गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान के द्वारा  प्राप्त किया जाता है। 

ॐ श्री आशुतोषाय नम:

श्री सिया बिहारी जी✍️

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