सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा.
इससे आध्यात्मिक के संदर्भ में प्रेरणा लेते हैं। कहने को इंसान के पास दो विकल्प होने चाहिए-अध्यात्म के रास्ते का चयन करना या अध्यात्म के रास्ते का चयन नहीं करना। माने इंसान आस्तिक हो या नास्तिक हो जाए। पर आज के तथाकथित गुरुओ ने लोगों के आगे मेडिटेशन (ध्यान) के अनेकानेक विकल्प रख दिए हैं। जैसे-ब्रीदिंग मेडिटेशन (श्वास पर आधारित ध्यान), डांसिंग मेडिटेशन (नृत्य पर आधारित ध्यान) मंत्र मेडिटेशन (शब्द पर आधारित ध्यान), म्यूजिक मेडिटेशन (संगीत पर आधारित ध्यान) इत्यादि। ऐसे में, हमारा मस्तिष्क निर्णय अक्षमता का शिकार हो जाता है। सही गलत का निर्णय नहीं ले पता है। आध्यात्मिक प्रगति की राह पर चलना तो दूर, वह ध्यान की सही प्रक्रिया का चयन तक नहीं कर पाता। यही कारण था कि हमारे संत- महापुरुषों ने कभी भी आध्यात्म -मार्ग के अनेक विकल्प नहीं रखें। उन्होंने हमेशा कहा- *महाजनों येन गत: स पन्था*:-पूर्ण महापुरुष जिस मार्ग से होकर गए, वही एक मार्ग है। अन्य कोई विकल्प नहीं है। और वह एक मार्ग सनातन है, वह है ईश्वर के साक्षात् दर्शन का मार्ग, ब्रह्मज्ञान। इस मार्ग का चयन करके ही मानव अपना जीवन सफल बना सकता है।
ॐ श्रीं आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
