नफ़रत की बरसात सदन से, भीषण उल्कापात सदन से। जनमत पर 'साकार' हो रहा, रह- रहकर आघात सदन से।

 

                   गोष्ठी में पधारे साहित्यकार जन

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 811वी काव्य गोष्ठी संस्था महासचिव वरिष्ठ कवि बृजेश राय जी के राप्ती नगर स्थित आवास पर संपन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अवधेश शर्मा 'नन्द' ने किया और संचालन किया संस्था सचिव भाई कुन्दन वर्मा 'पूरब'ने।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया कवयित्री श्रीमती वंदना सूर्यवंशी ने मां सरस्वती का आवाहन करके।

तत्पश्चात वरिष्ठ शायर निरंकार शुक्ल 'साकार' ने सदन की गिरती गरिमा पर ये ग़ज़ल पेश की , प्रस्तुत है कुछ शेर-

नफ़रत की बरसात सदन से,

भीषण उल्कापात सदन से।

जनमत पर 'साकार' हो रहा,

रह- रहकर आघात सदन से।

देश के नेतृत्व से प्रश्न करते हुए भोजपुरी गीत प्रस्तुत किया वरिष्ठ गीतकार राम सुधार सिंह सैथवार जी ने- 

विसवासे के छलि-छलि के जब , काल्ही क नेह धरल जाई !

तब देश क बोलऽ का होई ---

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि अवधेश शर्मा 'नन्द' जी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर टिप्पणी करते हुए यह दोहा पढ़ा -

'नन्द' सदा जग में हवे , ऊ मनई बुद्धिमान ।

नापि- तौलि गुन के रखे , जाने निज अग्यान।।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है श्रीमती वंदना सूर्यवंशी एवं सर्व श्री राम समुझ 'सांवरा' , बृजेश राय, कुन्दन वर्मा 'पूरब', डा.सत्य नारायण 'पथिक' आदि।

अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था महासचिव भाई बृजेश राय जी ने।

1 Comments

  1. साकार जी कब तक युवा कवि रहेंगे

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