सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
आज हम देख रहे हैं कि कैसे पूरे विश्व में हाहाकार मचा है। मानव सर्वनाश की ओर बढ़ रहा है। आज का मानव बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। यह दृश्य जो हम आज देख रहे हैं, उसका वर्णन कई साल पहले श्री गुरु आशुतोष जी महाराज जी ने एक भजन के माध्यम से कर दिया था -
*मानवता का भविष्य खड़ा आज सर्वनाश के द्वारे, युगदृष्टा की चेतना जीवन क्रांति गुहारे।*
श्री महाराज जी ने कहा था कि इस सर्वनाश को तभी रोका जा सकता है, जब एक-एक ब्रह्मज्ञानी साधक उस युगदृष्टा की चैतन्यता से अपने आप को जोड़ लेगा। प्रबल शैतानी ताकत को यदि हराया जा सकता है, तो केवल साधना की सूक्ष्म तरंगों से। इसके लिए समय भी अधिक नहीं है और लोग भी कम है। क्योंकि विश्व के 804 करोड लोगों में से, कुछ प्रतिशत को ही इस महान ज्ञान की प्राप्ति हुई है। हालांकि समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें यह ज्ञान नहीं मिला है, लेकिन अपने पूर्व संस्कारों के कारण वह अच्छे प्रयासों में संलग्न है। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक नहीं है। इसलिए आज स्थिति यह है कि करने वाले बहुत कम है और काम बहुत अधिक है। ऐसे में विशेषतः ज्ञानियों की निष्क्रियता से बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है। इसलिए आज का हमारा योगदान आज की हमारी साधना, आज की गई प्रार्थना ही भावी विश्व के लिए काम आएगी।
श्री गुरु आशुतोष जी महाराज जी ने उद्घोष किया है कल तो सुनहरा होगा ही होगा, नवयुग तो आना ही है। साधकों, महाराज जी के शब्द हमेशा सिद्ध हुए हैं। नवयुग की स्थापना होगी, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या हम वहां तक पहुंचेंगे? केवल चर्चा से कोई लाभ नहीं। इसके लिए हम सब ब्रह्मज्ञानियों को मिलकर साधना करनी होगी। क्योंकि कहा गया है -
*उधमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै*:-
उधम किए बिना कोई भी मनोरथ सफल नहीं होता। जो हमारे कर्तव्य, कार्य, दायित्व हैं, हम उन्हें भी निभाएं। साथ में साधना प्रार्थना का निरंतर अभ्यास बनाए रखें। याद रखें, समय से किया गया योगदान ही काम आता है।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
