गोष्ठी में भागीदारी निभाने वाले साहित्यकार जन
भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 816 वी काव्य गोष्ठी पूर्व पार्षद धर्मशाला बाजार स्व.राजकुमारी देवी के आवास पर जोशो-खरोश के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाई राहुल गुप्ता जी (पूर्व विधायक प्रत्याशी, गोरखपुर) एवं अध्यक्षता, संस्था पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी रहें।पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था सचिव एवं युवा कवि कुन्दन वर्मा 'पूरब' जी ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कवयित्री श्रीमती वंदना सूर्यवंशी जी द्वारा प्रस्तुत वीणावादनि की वंदना से हुआ।
वरिष्ठ ग़ज़लकार भाई नंद कुमार त्रिपाठी जी चंदा चोरी पर तंज करते हुए कहा -
कतर गए हैं पर अक्सर उड़ान से पहले,
नतीजे आ चुके हैं इम्तिहान के पहले।
आजकल के नये नये बने नेताओं पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की वरिष्ठ कवि श्री प्रमोद चोखानी जी ने -
आजकल हथेलियां भी नमक हराम हो गई,
अब कहां है हथेलियों पर सरसों उगाने वाले।
तुम कद्रदान बनो अदब से पेश तो आओ,
तुझको पलकों पर बिठा लेंगे जमाने वाले।
युवा कवि अजीत 'प्रेमी' ने व्यक्ति को खुद की मेहनत का भरोसा दिलाया इन पंक्तियों से -
खुद की मेहनत के बल पर, देते हैं सबको मात रे।
अपने दोनों हाथ रे, अपने दोनों हाथ रे।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन'जी ने
जीवन संघर्ष को इन शब्दों में उकेरा -
लहरे टकराती रहती है कूलन,
थिर ना होता उर का उद्वेलन।
नित जीवन के संघर्षों से यह,
टूट चुका है अपना अन्तर्मन।
अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है श्रीमती वंदना सूर्यवंशी व श्रीमती बिंदू चौहान एवं सर्वश्री बागेश्वरी प्रसाद मिश्र 'वागीश ' राम सुधार सिंह 'सैथवार' , अरविंद 'अकेला', अवधेश शर्मा 'नंद' , सुधाकर साहनी, कुन्दन वर्मा 'पूरब' ,
डा.सत्य नारायण 'पथिक' , डा.बहार गोरखपुरी, कौसर गोरखपुरी, राम समुझ 'सांवरा' , महमूद भाई , बद्री विश्वकर्मा 'सांवरिया' , दीदार बस्तवी आदि।
मुख्य अतिथि भाई राहुल गुप्ता जी ने कवियों की संवेदनाओं को हृदय से नमन किया और कहा कवि देश और समाज की चिंता में सदैव रत रहता है।
शुक्रवार को आचार्य मुकेश की माता श्रीमती शशि प्रभा श्रीवास्तव जी का 92 वर्ष की अवस्था में निधन होने से आहत कवि समाज ने उनके प्रति 2 मिनट का मौन रख करके उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था प्रबंधक डा. सत्य नारायण 'पथिक' ने।

अजीत प्रेमी जी का गोष्ठी में आगमन सुखद लग रहा है।
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